बैंक के तकादे से परेशान कर्ज में डूबे किसान ने सोमवार की सुबह खेत पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। भाई की तहरीर पर थाने में मामला दर्ज कराया गया है।
रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव फरीदपुर में किसान लल्लू सिंह का परिवार रहता है। उन्होंने वर्ष 2011 में प्रथमा बैंक शाखा रजबपुर से किसान क्रेडिट कार्ड पर 1.46 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उसी वर्ष 15 मार्च को उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके तीन बेटे देवेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह व सतेंद्र ने मिलकर कर्ज उतारा और गत वर्ष 1.64 लाख रुपये बैंक में जमा कर दिया।
कुछ दिन पहले बैंक ने देवेंद्र सिंह के नाम नोटिस जारी किया और पिता द्वारा लिए गए कर्ज में 1.46 लाख रुपये बकाया बताते हुए जल्द से जल्द रकम जमा कराने को कहा। इसके अलावा देवेंद्र सिंह (55) ने भी अपने नाम के क्रेडिट कार्ड पर दो लाख रुपये कर्ज ले रखा था। इस कारण वह पिछले कई दिन से तनाव में थे।
सोमवार की सुबह रोजाना की तरह खेत पर गए थे। सुबह दस बजे उनका छोटा भाई सतेंद्र जब खेत पर पहुंचा तो देवेंद्र की लाश पेड़ से झूलती दिखी। यह देख उसने शोर मचा दिया। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। परिजन रोते बिलखते मौके पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने लाश को पेड़ से उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जितेंद्र सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
त्रिवेणी शुगर मिल पर गन्ने का डेढ़ लाख बकाया
मृतक किसान देवेंद्र सिंह करीब 45 बीघा जमीन का मालिक था। त्रिवेणी शुगर मिल चंदनपुर छपना पर उसका 16 पर्चियों का डेढ़ लाख रुपये बकाया था। भाकियू कार्यकर्ता होने के नाते उसने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को आंदोलनों में भी भाग लिया था। लेकिन, मिल से गन्ने का पेंमेट होगा भी या नहीं, यह सोचकर वह परेशान था। ऊपर से बैंक के कर्ज ने परेशान कर रखा था। संभवत: कोई रास्ता न सूझने के कारण ही देवेंद्र सिंह ने जीवन लीला समाप्त करने का फैसला किया।