कार्तिक पूर्णिमा के दिन तिगरी में लगने वाले ऐतिहासिक गंगा मेले में जाने के लिए श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। दीवाली निपटते ही गंगा किनारे डेरा डालने के लिए तंबू से लेकर खाना बनाने के सामान आदि का बंदोबस्त शुरु कर दिया है। वहीं, गंगा की रेती में भैंसा, बैल हिम्मत न हारें। इसलिए उन्हें रातव आदि खिलाया जा रहा है। गंगा का किनारा 19 नवंबर से तंबुओं के शहर में तब्दील हो जाएगा।
तिगरी गंगा मेला 19 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा। मुख्य स्नान 25 नवंबर को होगा। मेले में दस से पंद्रह लाख श्रद्धालु पहुंचने का अनुमान है।
देहात क्षेत्रों से अधिकांश श्रद्धालु, बुग्गी भैंसा, बैल गाड़ी, घोड़ा गाड़ी आदि में सवार होकर मेले में पहुंचते हैं। गंगा किनारे डेरा डालकर परिवार संग रहते हैं। यह मेला किसानों का पिकनिक भी कहलाता है।
इस बहाने किसानों को परिवार संग घूमने का मौका मिल जाता है। मेले में जाने के लिए लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। तंबू गाड़ने के लिए डेरा आदि का बंदोबस्त किया जा रहा है।
मेले में चूल्हे से लेकर खाना बनाने आदि के सामान की व्यवस्था करने में श्रद्धालु जुट गए हैं। वहीं भैंसा और बैलों को भी चने का दाना और रातव खिलाने के साथ ही घी और सरसों का तेल भी पिलाया जा रहा है। ताकि गंगा की रेती में पशु हिम्मत न हारें। युवा वर्ग में मेले को लेकर उत्साहित है।