जरूरतमंदों को अस्पताल लाने के लिए सीएचसी गजरौला में तैनात 102 एंबुलेंस की हालत ठीक नहीं रह गई है। हाल यह है कि बैटरी और सेल्फ खराब होने से उसे स्टार्ट करने के लिए चार दिन से धक्का लगाना पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की 102 एंबुलेंस जच्चा-बच्चा की जान को भी मुसीबत में डाल सकती है।
बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो 108 व दो 102 एम्बुलेंस हैं। 108 घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का कार्य करती है। जबकि 102 एंबुलेंस गर्भवती महिला को अस्पताल से घर तक लाने व ले जाने का कार्य करती है।
सरकारी अस्पताल की एक 102 एम्बुलेंस की हालत खस्ता है। एंबुलेंस की बैटरी और सेल्फ खराब होने से कर्मचारियों को एंबुलेंस स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना पड़ता है। बता दें कि इस एंबुलेंस का पायलट विजेंद्र और ईएमटी गौरव हैं।
उनका कहना है कि, एंबुलेंस में और भी खामियां हैं। इमरजेंसी केस में यदि कहीं भी एंबुलेंस बंद हो गई तो मात्र ईएमटी और पायलट के धक्का लगाने से एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हो सकेगी। क्योंकि 102 में गर्भवती महिला के साथ परिवार की महिलाएं ही मौजूद रहती हैं।
जिला कोआर्डिनेटर दीपक सिंह ने बातया कि मैने जानकारी ली है, हो सकता है कि ठंड की वजह से सेल्फ में दिक्कत आई हो, फिलहाल मामला संज्ञान आने पर गंभीरता से लिया गया है, यदि एंबुुलेंस में कोई खराबी है तो उसे चौबीस घंटे के अंदर ही ठीक करा लिया जाएगा, किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होने दी जाएगी।