नेशनल हाईवे पर गांव कांकाठेर के पास रविवार सुबह 11 बजे कैंटर और कार की आमने-सामने टक्कर हो गई। भीषण हादसे में कार सवार दो महिलाओं समेत तीन लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि मासूमों समेत चार लोग घायल हो गए।
प्राइवेट एंबुलेंस घायलों को निजी नर्सिंग होम ले गई, जहां उपचार के बाद हालत में सुधार बताया जा रहा है। हादसे के बाद भाग रहे कैंटर को पुलिस ने पीछा कर रोका, हालांकि चालक भागने में कामयाब रहा।
जनपद गाजियाबाद क्षेत्र के गांव बमैना निवासी रमेश सिंह(37) पुत्र ओमप्रकाश परिवार के अन्य सदस्यों और मोहल्ले के कुछ लोगों के साथ शनिवार को इंडिगो से अपने पुराने किरायेदार वीर सिंह के परिवार में आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने के लिए मूंड़ा पाण्डेय (जिला मुरादाबाद) गए थे।
विवाह समारोह संपन्न होने के बाद रविवार सुबह 11 बजे वे कार से गांव बमैना लौट रहे थे। साथ में बेटा कुशाल, चाची माया देवी पत्नी ब्रजलाल, पड़ोसी राजकुमार, उनकी पत्नी बाला देवी, बेटी ललिता और किरायेदार मिन्टू का बेटा हिमांशु भी था।
रमेश स्वयं ही कार चला रहे थे, अभी वे कांकाठेर गांव के पास ही पहुंचे थे कि दिल्ली की ओर से आ रहे कैंटर से आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। भीषण हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग उधर दौड़े, मगर लोगों को आता देख कैंटर चालक वाहन समेत मुरादाबाद की ओर भाग निकला। सूचना पर ब्रजघाट चौकी पुलिस और हाईवे मोबाइल तत्काल मौके पर पहुंची और लोगों को बाहर निकाला।
मगर, तब तक रमेश सिंह, माया देवी और बाला देवी की मौत हो चुकी थी, जबकि अन्य घायल थे। पुलिस ने शवों को सरकारी अस्पताल भेज दिया, वहीं घायलों को प्राइवेट एंबुलेंस से चौपला स्थित नर्सिंग होम भेजा गया।
वहीं पुलिस ने कैंटर का पीछा किया तो चालक भानपुर रेलवे क्रासिंग पर कैंटर छोड़ कर भाग निकला। पुलिस ने कैंटर और कार को कब्जे में कर लिया है।
काश मेरी बात मान लेता तो नहीं जाती जान
गजरौला। हादसे की सूचना पर सरकारी अस्पताल पहुंचे मृतक रमेश सिंह के बड़े भाई सुभाष सिंह शव देख कर बिलख पड़े। उनका रो-रोकर बुराहाल था। आंखों से बही अश्रुधारा थम नहीं रही थी।
उनका कहना था कि काश रमेश मेरी बात मान लेता तो शायद जान बच जाती। उन्होंने बताया कि विवाह समारोह से उन्हें भी आज ही गाजियाबाद वापस लौटना था। वह शाम को गाजियाबाद के लिए निकलते लेकिन रमेश जल्दी कर रहा था।
उन्होंने रमेश को समझाने का भी प्रयास किया तो शाम तो वह रुक जाए तो वह भी साथ चलेंगे। लेकिन रमेश नहीं माना और हादसे ने उसकी जान ले ली।
पिता के बारे में ही पूछता रहा कुशाल
गजरौला। हादसे में मारे गए ड्राइवर रमेश के समेत दोनों महिलाओं का शव सरकारी अस्पताल में रखा था। जबकि रमेश का घायल बेटा कुशाल समेत चार लोगों को निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था।
निजी नर्सिंग होम में उपचार के दौरान कुशाल बार-बार अपने पिता के बारे में ही पूछ रहा था कि उसके पिता किस अस्पताल में हैं और कैसे हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
गजरौला। रमेश की मौत के साथ ही तीन परिवार बिखर गए। तीन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रमेश के बड़े भाई सुभाष ने बताया कि रमेश नोएडा की एक कंपनी में चालक था।
एक माह पहले ही उसकी नौकरी छूट गई थी, लेकिन फिर भी वह अलग-अलग गाड़ियों पर चालक का कार्य कर परिवार का भरण पोषण कर रहा था और अपने परिवार के साथ खुश था।
पत्नी गुड्डन को घटना की जानकारी नहीं दी गई है। जब उसे पता चलेगा तो वह टूट जाएगी। रमेश को एक बेटा कुशाल व दो बेटी कीर्ति, कशिश हैं। अब उनके पालन पोषण पर संकट गहरा गया है।