हसनपुर। आखिरकार ग्राम प्रधान ईशापुर शर्की पर गाज गिर ही गई। कई बार ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की थी, जिसकी जांच भी कराई गई। दूसरी पंचायत में मनरेगा मजदूर के खाते में बिना काम के ही धनराशि भेज दी। जिसका दोषी मानते हुए डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। ग्राम पंचायत के कार्य कराने के लिए तीन सदस्यीय टीम का भी गठन किया गया है।
हसनपुर ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत ईशापुर शर्की की ग्राम प्रधान रजनी पर विकास कार्यों में लापरवाही करने जैसे आरोप लगे थे। ग्रामीणों ने इनकी शिकायत भी की। ग्राम प्रधान ने दूसरी ग्राम पंचायत झुंडी माफी के तहत आने वाले ग्राम पीपली वक्काल में स्थित तालाब पर काम कराया, जबकि कार्य स्थल की परिसीमाओं की जानकारी के बाद भी विकास कार्य हुआ। इसके अलावा मनरेगा मजदूर विपिन कुमार और जागेंद्र सिंह के बैंक खाते में 400 और 9000 रुपये की धनराशि प्रेषित कर दी, जबकि इन्होंने काम किया ही नहीं। दोषी मानते हुए डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। विकास कार्यों के संचालन को किरन देवी, ब्रह्मपाल और श्रीचंद की एक कमेटी बनाई है। अधिकारी सीज होने की पुष्टि सहायक विकास अधिकारी पंचायत नौबत सिंह ने की है। उधर अमरोहा के मऊमय चक के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया था। साथ ही मनरेगा मजदूरों का हक मारने और फर्जी तरीके से उनके नाम की मजदूरी निकालने का आरोप लगाते हुए सीडीओ से मामले की शिकायत की थी। सीडीओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ को जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। मजदूरों का कहना है कि ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा योजना के तहत कागजों में विकास कार्य कराए हैं। ग्राम पंचायत में कोई भी विकास कार्य नहीं कराए गए। मजदूरों के नाम पर फर्जी तरीके से उनकी मजदूरी भी निकाल ली गई।