कुमाऊंनी भाषा साहित्य संस्कृति प्रचार समिति की ओर से नगर के थाना बाजार स्थित कुंदन लाल शाह प्रेक्षागृह में चल रहे तीन दिनी दसवें राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के दूसरे दिन मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रप्रकाश फुलोरिया ने कहा कि बच्चों और युवाओं को कुमाऊंनी भाषा, साहित्य-संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कम से कम 25 प्रतिशत प्रश्न कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं पर आधारित होने चाहिए। उत्तराखंड में कुमाऊंनी और गढ़वाली बोलने वाले और जानने वाले अधिकारियों की ही नियुक्ति की जानी चाहिए।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिवा भट्ट ने कहा कि कुमाऊंनी में महिला लेखकों की संख्या कम है। साहित्य के विकास के लिए महिला रचनाकारों को सामने आने और महिलाओं को प्रेरित करने की जरूरत है। अध्यक्षता करते हुए डॉ. विपिन चंद्र शाह ने कहा कि कुमाऊं विवि में एमए में शीघ्र कुमाऊंनी भाषा पाठ्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए। इससे कुमाऊंनी भाषा बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय बनेगी।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. इला साह ने कहा कि कुमाऊं की महिलाएं कुमाऊंनी संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वह अभी भी कुमाऊंनी रीति-रिवाजों, परंपराओं का पालन करती हैं। सम्मेलन में डॉ. दीपा कांडपाल को पुष्पलता जोशी कुमाऊंनी लेखन पुरस्कार, देवेंद्र कड़ाकोटी को भारतेंदु निर्मल जोशी कुमाऊंनी समालोचना पुरस्कार, डॉ. पवनेश ठकुराठी को अरुण कुमार भट्ट कुमाऊंनी लघुकथा लेखन पुरस्कार और जमुना देवी स्मृति कुमाऊंनी हास्य पुरस्कार, शिवराज सिंह भंडारी को कुमाऊंनी शब्द चित्र लेखन पुरस्कार, महेंद्र सिंह को गोविंद सिंह बिष्ट स्मृति हास्य व्यंग लेखन पुरस्कार, नारायण मेहरा को इंद्र सिंह स्मृति कुमाऊंनी बाल कहानी पुरस्कार, भुवन जोशी को कालू सिंह स्मृति संस्मरण लेखन पुरस्कार दिया गया।
प्रो. देव सिंह पोखरिया, कुबेर सिंह कड़ाकोटी, डॉ. विपिन चंद्र शाह, पान सिंह राणा को बहादुर सिंह बनौला स्मृति कुमाऊंनी साहित्य सेवी सम्मान, लोक गायक गंभीर दारमीज और तारा सिंह लोधियाल को वैद्य कल्याण सिंह बिष्ट कुमाऊंनी संस्कृति सेवी सम्मान, देव सिंह पिलख्वाल और डॉ. जीवन सिंह मेहता को पान सिंह चन्याल स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। दिल्ली से आए साहित्यकार गिरीश चंद्र बिष्ट हंसमुख के कुमाऊंनी उपन्यास हवसियाट, नवीन जोशी के कुमाऊंनी नाटक बोकी पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
कुमाऊंनी में कविता सुनाकर बुराइयों पर कटाक्ष किया
सम्मेलन में लगी पुस्तक प्रदर्शनी में कुमाऊंनी भाषा, साहित्य, संस्कृति, व्याकरण और शब्दकोश से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। चित्रकार दान सिंह फर्त्याल द्वारा लगाई गई रेखाचित्र प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी है। कवि सम्मेलन में 60 से अधिक कुमाऊंनी कवियों ने कविता पाठ किया।