अल्मोड़ा। भारत की जनवादी नौजवान सभा की नगर पालिका सभागार में हुई गोष्ठी में मुख्य वक्ता शिक्षाविद् विजय रावत ने कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था के आगमन के बाद जब उत्पादन के साधनों में बदलाव आया तो इंसान को श्रम को बेचने की व्यवस्था की शुरुआत हुई। यहीं से रोजगार और बेरोजगारी का सवाल पैदा हुआ।
रावत ने कहा कि वर्तमान तक आते-आते स्थितियां इतनी भयावह हो गई है कि बाजार में जितना बेरोजगार युवक है उसका एक प्रतिशत ही रोजगार पैदा हो पा रहा है। पूंजीवादी व्यवस्था मुनाफे पर टिकी होती है। इसलिए उसे ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए सस्ते श्रमिक की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महंगाई इसलिए बढ़ रही है कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली खत्म कर दी है।
वस्तुओं को सट्टा बाजार के हवाले कर दिया है। जिस कारण खाद्य वस्तुओं में सरकार का नियंत्रण खत्म हो गया है। पूर्व की कांग्रेस सरकार और वर्तमान की मोदी सरकार की नीतियां पूंजीवादी व्यवस्था के साथ है। वक्ताओं ने 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को देने, एचएमटी को पुनर्जीवित करने, ग्राम पंचायत एक्ट में शौचालय की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की।
अध्यक्षता योगेश कुमार टम्टा और संचालन यूसुफ तिवारी ने किया। वहां राजेंद्र प्रसाद जोशी, ईश्वरी दत्त जोशी, सुनीता पांडे, दिनेश पांडे ने विचार रखे। गोष्ठी में विवेक साह, अनीता कनवाल, मुकुल तिवारी, मो. नाजिर, स्वप्निल पांडे, राजीव बिष्ट, दीपक वाल्मीकि आदि थे।