महिला एकता परिषद की संगोष्ठी में सरकार से प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंदी करने की मांग उठाई गई। कहा कि शराब के बढ़ते प्रचलन से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। संगोष्ठी में भारी संख्या में पहुंची महिलाओं ने बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर चर्चा की। जंगली जानवरों की समस्या हल नहीं होने पर आक्रोश जताया। इसके लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को दोषी ठहराया। ऐलान किया कि वोट उसी प्रत्याशी को दिया जाएगा, जो जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने की बात करेगा।
परिषद की स्थापना के 20 साल पूरे होने पर परिषद की ओर से शीतला पुष्कर मैदान में आयोजित संगोष्ठी में आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों महिलाएं उमड़ पड़ी। महिलाओं ने कहा कि सरकारों की नाकामी के चलते पहाड़ बर्बाद हो रहे हैं। शराब का प्रचलन बढ़ चुका है। जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। कहा कि जब एक दिन में पूरे भारत में नोटबंदी की जा सकती है तो जंगली जानवरों के आतंक से निपटने के लिए ठोस नीति क्यों नहीं बनाई जा सकती। इस मौके पर कई महिलाओं चुनाव में स्थायी निवासी प्रत्याशियों को ही जिताने पर जो दिया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि परिषद की प्रदेश संयोजिका अनुराधा पांडे ने कहा कि विस में जंगली जानवरों के आतंक की बात को प्राथमिकता से रखनी चाहिए। भिकियासैंण की प्रमुख हिमानी नैनवाल ने महिला संगठनों से इस संघर्ष को अनवरत रखने का आह्वान किया। द्वाराहाट की प्रमुख ममता भट्ट ने अभियान की सराहना की। दन्या से पहुंची पुष्पा देवी ने भी जंगली जानवरों की समस्या उठाई। परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष दुर्गा बिष्ट ने चौपट होती खेती के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। लक्ष्मी देवी, हंसी देवी, गोविंदी देवी, शीला देवी, प्रभा बिष्ट, रेवती देवी, पार्वती रावत,, गोदावरी देवी, तुलसी देवी, मोहनी देवी, हेमा नेगी आदि ने भी विचार रखे। संचालन परिषद की सचिव मधुबाला कांडपाल ने किया।
महिला एकता परिषद की संगोष्ठी में पहुंची अधिकांश वक्ताओं ने कुमाऊंनी में विचार रखे। सनणैं की प्रधान पुष्पा रावत ने कहा कि छह मैंसों बीच बटि मीं महिला प्रधान चुनी रयूं। चुनाव में उनुल एक डबल ले खर्च नी करी। कहा कि बानर, सूअरों आतंक हैं निजात दिलूंण मांग लीबेर प्रधानों दगड़ि मैंल दिल्ली में राष्ट्रपति दगड़ि मुलाकात करी, लेकिन क्ये फरक नी पड़ि।