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परंपरा के साथ बेटियों को सम्मान दे रहा मर्तोलिया समुदाय

Tue, 31 Jan 2017 10:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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खिचड़ी उत्सव में खुशियां मनातीं मार्तोलिया समुदाय की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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 ज्वार मुनस्यारा, भुला मुनस्यारा, हमी सौंकारा हम देश ज्वारा... यह गीत जौहार मुनस्यारी जनजाति परिवार का पारंपरिक गीत है जिसे जौहार मुनस्यारी जनजाति परिवार के लोग आज भी किसी विशेष उत्सव में गाते हैं। सालों से अल्मोड़ा में रह रहे मर्तोलिया जनजाति समुदाय के लोग भी पिछले आठ सालों से माघ महीने में खिचड़ी उत्सव का आयोजन कर इन गीतों के जरिए विवाहित बहनों और भांजियों को सम्मान दे रहे हैं। यह परंपरा जहां एक ओर परिवारों को जोड़ने का काम कर रही, वहीं बेटियों को सम्मान देने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रही है।  
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खिचड़ी उत्सव को जौहार-मुनस्यारी जनजाति परिवार सदियों से मनाता आ रहा है। यह उत्सव इसलिए भी मायने रखता है कि उत्सव के जरिए बहन-भांजियों का विशेष सम्मान किया जाता है। पिछले आठ सालों से मर्तोलिया परिवार अल्मोड़ा में यह उत्सव मनाता आ रहा है। 62 वर्षीय मंत्री मर्तोलिया बताती हैं कि माघ महीने में होने वाले इस उत्सव में विवाहित बहनों और भांजियों को विशेष आदर के साथ किसी विशेष स्थान पर बुलाया जाता है। इस दौरान खेलकूद, मटका फोड़ आदि प्रतियोगिताएं होती हैं। अपनी भाषा में परिवार के लोग विचारों को रखते हैं और महिलाएं झोड़ा, चांचरी गिर गौं बटि पुजि गो छुं कालि मुनि मंदिर, ज्चार मुनस्यारा भुला मुनस्यारा आदि लोक गीतों के जरिए खुशियां मनाती हैं। इस बार भी यह उत्सव मर्तोलिया परिवार ने बड़े धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम का आयोजन करने वाले करन मर्तोलिया, कुंदन मर्तोलिया और धीरेंद्र मर्तोलिया ने बताया कि पांच साल की बच्ची से लेकर 78 साल की बुजुर्ग महिलाओं ने इस उत्सव में शिरकत की। दिन भर साथ रहने के बाद बहनों और भांजियों को विशेष उपहार भी बांटे गए। 
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