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वन्य जीवों के अवैध शिकार से कई प्रजातियों को खतरा

Wed, 24 Feb 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की अपर निदेशक त्रिलोतमा वर्मा ने कहा कि सामान्यतया अन्य अपराधों का क्षेत्र सीमित होता है पर वन्य जीव अपराध की घटनाओं की सीमा देश और विदेशों से भी जुड़ी होती है।
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उन्होंने कहा कि वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश के लिए वन विभाग के साथ की सेना, अर्द्ध सेना आदि विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और समन्वय होना जरूरी है।

वन चेतना केंद्र एनटीडी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के अवैध शिकार से कई प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में है। तस्कर खाल, हड्डी, मांस आदि के लिए निरीह पशुओं को मार डालते हैं। जानवरों के संरक्षण के लिए कई कानून बने हैं।
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वाइल्ड लाइफ क्राइम की कानूनी जानकारी होने के बावजूद अकेले वन विभाग वन्य जीव अपराध रोकने में सक्षम नहीं है। इसके लिए पुलिस, सेना, आईटीबीपी, एसएसबी समेत अन्य अर्द्ध सैनिक बलों, परिवहन विभाग और वन विभाग के बीच सूचनाओं का त्वरित समन्वय होना जरूरी है ताकि वन्य जीवों से संबंधित अपराध होने पर तत्काल सूचना मिल सके और अपराधियों की तुरंत धर-पकड़ हो सके।

केंद्रीय वन संरक्षक निशांत वर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने सीमा क्षेत्रों सहित सभी स्थानों पर वन्य जीवों से संबंधित अपराधों पर रोक के लिए समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया। बृहस्पतिवार 25 फरवरी को ग्राम प्रधानों, सरपंचों आदि की कार्यशाला होगी।

इस मौके पर एसएसबी के डीआईजी पुष्कर सिंह मेहरा, एसपी अल्मोड़ा केएस नगन्याल, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड डा. धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डा. राजेंद्र सिंह, वन संरक्षक उत्तरी वृत्त प्रेम कुमार, डीएफओ एसआर प्रजापति के अलावा मंडल के विभिन्न जिलों के अधिकारी, प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी आदि ने भाग लिया।
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