जंगल की आग शनिवार की सुबह ताड़ीखेत ब्लॉक के सिमोली गांव तक जा पहुंची। घटना में दो मंजिला बंद भवन जलकर राख हो गया। ग्रामीणों के 13 लूटे घास, एक पालीहाउस और लकड़ियां भी आग की भेंट चढ़ गईं। आग को देखकर ग्रामीणों के हाथ पांव फूल गए, लोग अपने अपने सामान की सुरक्षा कर दिन भर आग बुझाने में जुटे रहे।
बताया गया है कि शुक्रवार की देर रात उणीं और मटेला के जंगल में आग लगी थी। आग सुलगते-सुलगते शनिवार की सुबह सिमोली गांव तक आ पहुंची। गांव में आग देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण अपने अपने संसाधनों से आग बुझाने में जुट गए, लेकिन हवा के साथ आग और भी विकराल हो गई। आग ने जनार्दन पांडे के पुराने बंद पड़े भवन को अपनी चपेट में ले लिया। जनार्दन पांडे परिवार सहित वाराणसी रहते हैं, कुछ ही पलों में दो मंजिला मकान पूरी तरह से राख हो गया। ग्रामीण दीप चंद्र पांडे के छह, कविदत्त पांडे के पांच और जीवन राम और ज्वालादत्त के 13 घास के लूटे जलकर राख हो गए। पास ही छप्पर के अंदर रखा मवेशियों का चारा और लकड़ियां भी आग की भेंट चढ़ गई। ग्रामीण दीप चंद्र का पालीहाउस भी जल गया। ग्रामीणों का पूरा दिन वहां आग बुझाने में लगा रहा। ग्रामीणों के प्रयासों से ही अधिक नुकसान फिलहाल टल गया है। इधर राजस्व उप निरीक्षक भूपाल गिरि गोस्वामी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गांव में आग से हुए नुकसान का आंकलन किया।