ग्रामीण क्षेत्रों में सुअर काश्तकारों के लिए आफत बन गए हैं। सुअरों के झुंड खेती को चौपट कर रहे हैं। सुअरों से फसलों को बचाने के लिए सरकार और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की हदबंदी (दीवारबंदी) करने की घोषणा की थी। वन विभाग ने इस संबंध में कैंपा योजना के तहत प्रदेश सरकार को करीब 2.5 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन छह माह बाद भी वन विभाग को बजट नहीं मिला है। इससे यह योजना अधर में लटकी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों से काश्तकार परेशान हैं। जिले के सभी ग्रामीण इलाकों में सुअरों का आतंक बना हुआ है। सुअरों के झुंड खेती को नष्ट कर रहे हैं। काश्तकार बाजार से महंगा बीज खरीदकर फसल बोते हैं, लेकिन सुअरों के झुंड फसल को चौपट कर रहे हैं।
सुअरों के आतंक से कई ग्रामीण इलाकों में काश्तकार आलू, गडेरी, पिनालू, सब्जी, गेहूं, धान आदि की खेती से विमुख हो रहे हैं। समय समय पर काश्तकार मुख्यमंत्री, शासन के उच्चाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से सूअरों के आतंक से निजात दिलाने की गुहार करते आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गांवों की कृषि भूमि की दीवारबंदी करने की घोषणा की थी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि योग्य भीम की दीवार से घेरबाड़ करने की योजना प्रस्तावित है। योजना के तहत 1.20 मीटर ऊंची और 60 सेमी चौड़ी ठोस पत्थरों की दीवार बनाई जानी है। दीवार के ऊपर 15 सेमी मोटाई का सीसी भी किया जाएगा। वन विभाग की योजना शुरुआत में सूअरों के आतंक से अत्यधिक प्रभावित गांवों में दीवार बंदी करने की योजना थी। वन विभाग के उत्तरी वृत्त के वन संरक्षक प्रेम कुमार ने बताया कि कैंपा योजना के तहत इस संबंध में करीब 2.5 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर फरवरी माह में शासन को भेजा गया है, लेकिन अब तक बजट नहीं मिला है। बजट मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।