पहाड़ के जंगलों में उगने वाला जंगली फल किलमोड़ा कालाजार की बीमारी से लड़ने में सहायक होगा। एसएसजे और जेएनयू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान के शोधार्थियों को किलमोड़े के 14 तत्वों से कालाजार के परजीवी लीशमैनिया डोनोवाली को नष्ट करने में सफलता मिली है।
पहाड़ के जंगलों में उगने वाला जंगली फल किलमोड़ा कालाजार की बीमारी से लड़ने में सहायक होगा। एसएसजे और जेएनयू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान के शोधार्थियों को किलमोड़े के 14 तत्वों से कालाजार के परजीवी लीशमैनिया डोनोवाली को नष्ट करने में सफलता मिली है। शोध में पाया गया कि किलमोड़ा के सौ से 14 तत्व लीशमैनिया डोनोवाली परजीवी के डेड बॉक्स हेलिकेज एंजाइम को नष्ट कर रहे हैं। एंजाइम के नष्ट होने से परजीवी की वृद्धि भी थम गई। वर्ष 2023 से 2024 तक चले शोध से प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर शोधार्थियों ने इन तत्वों को कालाजार के खिलाफ लड़ने में कारगर पाया।
हिसालू में भी मिले तत्व
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शोधार्थियों ने पूर्व में जंगली फल हिसालू की पत्ती और तने में भी कालाजार परजीवी को नष्ट करने वाली तत्वों की खोज की है। हिसालु के तत्व से उन्हें कलाजार परजीवी को नष्ट करने में सफलता मिली।
किलमोड़े की खूबियां
किलमोड़ा औषधीय गुणों की खान है। इसमें बर्बेरिन नामक रसायन पाया जाता है, जो एंटी बायोटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर होता है। यह लीवर के संक्रमण को दूर कर पाचन तंत्र मजबूत बनाता है और आंखों, त्वचा के संक्रमण से बचाता है। शोध में डॉ. मुकेश सामंत, डॉ. रोहिणी मुथुस्वामी, विनिता गौरी, केतकी पाटने, सुमित सिंह, आकांक्षा कनौजिया।
रेत मक्खी से फैलता है रोग
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संक्रमित रेत मक्खियों के काटने से कालाजार फैलता है। यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, कमजोरी रहती है और उसका रंग काला पड़ने लगता है।
शोध कार्य को क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिलती है तो यह रोग से लड़ने के लिए सुरक्षित और बेहतर विकल्प बन सकता है। - डॉ. मुकेश सामंत, मुख्य अनुदेशक, एसएसजे विवि अल्मोड़ा