गढेरी, मूली उत्पादन के लिए मशहूर सुदरवर्ती मेहतगांव और गल्ली बस्यूरा में भी जंगली सुअरों ने खासा आतंक मचा रखा है। यहां के ग्रामीण सब्जी उत्पादन के माध्यम से आजीविका चलाते थे, लेकिन सुअरों ने खेत खोदकर पूरी सब्जी बर्बाद कर दी। इसके अलावा गेहूं, सरसों और मसूर की फसल भी इस बार सुअरों और बंदरों ने चट कर ही है। बेबस काश्तकार खेती से विमुख हो रहे हैं।
मेहतगांव और गल्ली बस्यूरा सब्जी उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, पूर्व में ग्रामीण गढेरी, मूली का उत्पादन कर सालभर के खाने पीने का इंतजाम कर लेते थे, लेकिन जंगली सुअरों और बंदरों ने पिछले एक दशक में खासा आतंक मचाकर खेती-बाड़ी चौपट कर दी है। काश्तकार ललित मेहता का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों का अस्तित्व बचाने के लिए खेती किसानी को बचाना जरूरी है, वन्य जीवों के बढ़ते आतंक से लोग दुखी हैं।
उनका कहना है कि कभी इस क्षेत्र में गढेरी, आलू और मूली का प्रचुर उत्पादन होता था, बेचने के बाद काश्तकार अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों को भी सब्जी देते थे, अब खुद के लिए सब्जी के लाले पड़ रहे हैं। गल्ली बस्यूरा के बुजुर्ग काश्तकार दयानंद जोशी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ जंगली जानवरों के हवाले चढ़ने के कारण पहाड़ का अस्तित्व ही खतरे में है। तीन नाली भूमि में गढेरी और आलू का बीज लगाया था, यहां मूली का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है, लेकिन सुअरों ने सारी सब्जी चट कर दी है। सरकार जब तक वन्य जीवों के आतंक पर रोक नहीं लगाती तब तक पलायन रुकना नामुमकिन है।