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’पहाड़ के दर्द को समझने वाले को ही जिताएं’

Tue, 27 Dec 2016 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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पद यात्रा में शामिल महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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 महिला एकता परिषद की राजनीतिक जागरूकता पदयात्रा के दूसरे चरण का शुभारंभ भिकियासैंण के घुघती गांव से हुआ। यात्रा से पहले हुई गोष्ठी में महिलाओं ने पहाड़ की खेती किसानी बचाने के लिए एकजुटता का आह्वान किया। इस दौरान सरकारों पर कृषि व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि पहाड़ के दर्द को समझने वाले प्रतिनिधि को ही विधानसभा भेजें।
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प्रधान जानकी देवी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में परिषद की सचिव मधुबाला कांडपाल ने कहा कि पहाड़ से पलायन का प्रमुख कारण खेती की दुर्दशा है। राज्य बनने के बाद उम्मीद थी कि सरकारें पहाड़ की परंपरागत खेती को बचाने के लिए ठोस नीतियां बनाएगी, लेकिन आज तक नीति नहीं बनी, जंगली जानवरों ने खेत तबाह कर दिए हैं, लोग खेती से विमुख होकर पलायन कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी इस संबंध में कभी भी सदनों में आवाज तक नहीं उठाई। प्रधान हेमा नेगी ने कहा कि तीन दशक पूर्व तक पहाड़ खुशहाल थे, खेत सोना उगलते थे, लेकिन अब बंदर, सुअरों ने सब कुछ तबाह कर दिया है, इसी कारण युवा पीढ़ी को खेती किसानी में अपना भविष्य नजर नहीं आ रहा है और वह पलायन कर रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र से प्रतिनिधि चुनने में इस बार सावधानी बरती जाएगी। प्रतिनिधि ऐसा चुना जाएगा, जो जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने का आश्वासन देगा साथ ही वह पहाड़ के दर्द को समझने वाला हो। सरकार से ग्रामीण परिवेश के प्रतिनिधि को ही टिकट देने की मांग उठाई गई। ग्रामीणों से वोट मांगने आने वाले प्रतिनिधियों से शपथ पत्र लेने का आह्वान किया गया। पदयात्रा में दुर्गा बिष्ट, ममता बिष्ट, प्रताप बिष्ट, त्रिलोक सिंह, कुंदन सिंह, पुष्पा देवी, तारा देवी सहित कई लोग शामिल थे।
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