मौलेखाल (अल्मोड़ा)। लो-वोल्टेज की समस्या के चलते कोटेश्वर-शशीखाल पंपिंग योजना से पिछले चार दिन से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। मौलेखाल तहसील मुख्यालय, बाजार समेत सौ गांवों की लगभग बीस हजार जनता पेयजल संकट से जूझ रही है लेकिन पेयजल निगम और ऊर्जा निगम इस ओर उदासीन बने हुए हैं।
कोटेश्वर-शशीखाल पंपिंग योजना से तहसील क्षेत्र के अंतर्गत 100 से अधिक गांवों की करीब बीस हजार से अधिक आबादी को पेयजल आपूर्ति होती है। पर इस योजना से पिछले चार दिन से पानी सप्लाई नहीं हो पा रहा है। इस कारण तहसील, ब्लाक मुख्यालय, मौलेखाल बाजार समेत आसपास के सौ से अधिक गांवों की बीस हजार आबादी पेयजल संकट से जूझने को मजबूर है।
पानी नहीं आने से लोग दूरदराज स्थित नौलों, सड़क किनारे स्थापित हैंडपंपों से पानी लाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि योजना से आए दिन पानी की आपूर्ति बाधित रहती है। पर पेयजल निगम इस ओर ध्यान नहीं देता है। चार दिन से पानी नहीं आने पर लोग प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। पानी का इंतजाम करने में भी उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है। पालतू जानवरों के लिए पानी जुटाने में उन्हें काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
नौलों और जल स्रोतों से पानी ढो रहे हैं लोग
अल्मोड़ा। नगर और जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल पेयजल की किल्लत बढ़ते जा रही है। ग्रामीण इलाकों में लोग एक से डेढ़ किमी दूर नौलों, जल स्रोतों से पानी ढो रहे हैं। गर्मी के दिनों में दूर से पानी लाने पर लोगों को पसीना छूट रहा है।
नगर के पश्चिमी पोखरखाली, धारानौला, खत्याड़ी, मकेड़ी, लोअर माल रोड में पानी की किल्लत बनी हुई है। कई स्थानों में पानी की अनियमित आपूर्ति भी हो रही है। लोगों ने बताया कि कई बार पानी नहीं आता है जिससे भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती है। पानी में फोर्स कम होने से भी घरों में पर्याप्त पानी नहीं आ रहा है। कई बार तो इतना कम पानी मिल पाता है कि फिर नौलों और धारों से पानी लाना पड़ता है। पेयजल किल्लत के चलते लोग परेशान है। पर्यटन सीजन के चलते इन दिनों लोगों के घरों में कई मेहमान भी आए हैं। परिवार में लोगों की संख्या बढ़ने से पानी की खपत भी बढ़ने लगी है। दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण इलाकों में भी पानी की जबरदस्त किल्लत चल रही है। ग्राम पंचायत बल्टा के तोक मल्ला बल्टा में अनुसूचित जाति के 28 परिवारों को दैवी आपदा के प्रकोप को देखते हुए वर्ष 2010 में विस्थापित किया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापित परिवारों के लिए एक मात्र पेयजल लाइन कसारदेवी से बनाई गई ती। माट गांव के लिए मोटर मार्ग निर्माण के दौरान ये पेयजल लाइन मलबे से दब गई जिस वजह से लाइन में पेयजल आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। इलाकों में लोग एक से डेढ़ किमी नौलों और प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढो रहे हैं।
गर्मी के दिनों में जला पूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी मिल रहा है। पेयजल लाइन की जल्द मरम्मत की जानी चाहिए ताकि लोगों को आसानी से जलापूर्ति हो सके।
हरी राम आर्या, बल्टा
पानी की किल्लत के चलते परिवार और मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम करना मुश्किल पड़ रहा है। ग्रामीणों का अधिकतर समय पानी के इंतजाम में ही बर्बाद हो रहा है। पेयजल समस्या का जल्द समाधान किया जाए।
महेश लाल, बल्टा