मेले में विनोद सर्वश्रेष्ठ गोविंदा चुना गया।
- फोटो : अमर उजाला
सुदूरवर्ती स्याल्दे विकासखंड के भाकुड़ा में नंदा देवी महोत्सव (पाती कौतिक) संपन्न हुआ। यह कौतिक कृष्ण जन्माष्टमी के हांडी फोड़ प्रतियोगिता की तर्ज पर मनाया जाता है, ग्रामीण जंगल से विशालकाय चीड़ के पेड़ को आमंत्रित कर मेला स्थल पर लाते हैं, पेड़ के अंतिम सिरे पर इनामी धनराशि की पोटली बांधी जाती है। इसके बाद ग्रामीण युवकों के बीच इस पोटली को झपटने की होड़ मचती है। इस बार उदयपुर के युवक विनोद कुमार ने सबको पछाड़ते हुए इनामी धनराशि की पोटली झपट ली और सर्वश्रेष्ठ गोविंदा बने।
पाती कौतिक की मेजबानी इस साल मल्ला भाकुड़ा के सीरा गांव को मिली। मेला धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह मां नंदा की पूजा अर्चना की गई। एक दिन पहले से ही देवी-देवताओं को आमंत्रित करने का कार्य शुरू हो जाता है। दूसरे दिन ग्रामीण जंगल से विशालकाय चीड़ के पेड़ को आमंत्रित कर मेला स्थल पर लाए। यहां पेड़ की छाल निकालकर साबुन और चिकनी मिट्टी से लेप किया गया। 50 फुट ऊंचे पेड़ की चोटी पर इनामी धनराशि की पोटली बांध दी गई।
इसके बाद गोविंदाओं में पोटली झटकने की होड़ मच गई। दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में युवक वहां पहुंचे। युवाओं के बीच यह प्रतिस्पर्धा तकरीबन दो घंटे तक चलती रही। अंत में उदयपुर स्थित हरलाल वर्मा इंटर कालेज के 10वीं कक्षा के छात्र विनोद कुमार ने सभी को पछाड़ते हुए इनामी पोटली झटकी और सर्वश्रेष्ठ गोविंदा का पुरस्कार भी जीत लिया। सामाजिक कार्यकर्ता विजय उनियाल ने बताया कि पाती मेले को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष आयोजन के यजमान दिवान सिंह गुसाईं रहे। मालूम हो कि प्राचीन काल से ही राजवंशी चंद गुसाईं लोग मां नंदा को पूजते रहे हैं, मां नंदा के नाम पर ही यहां पाती कौतिक मनाया जाता है। गत वर्ष सिमलचौरा गांव को मेजबानी का मौका मिला था, तब जड़पानी के युवक सुनील कुमार सर्वश्रेष्ठ गोविंदा बने थे।