बिनसर वन्यजीव विहार के सीमावर्ती क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन बनाए जाने के प्रयासों के विरोध में विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों ने बुधवार को बिनसर सेंचुरी गेट में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। बाद में वहीं पर धरने पर बैठ गए।
धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग वन्य जीव विहार के सीमावर्ती क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन बनाए जाने का प्रयास कर रहा है जबकि पूर्व में अवैधानिक तरीके से बनाए गए बिनसर अभ्यारण्य से उत्पन्न समस्याओं से ग्रामीण परेशान हैं। उन्होंने कहा कि बिनसर वन्य जीव विहार की भौगोलिक, वैधानिक स्थिति अन्य वन्य जीव विहारों से अलग है।
आनन-फानन में बनाए गए और छोटे से क्षेत्र में फैले इस अभ्यारण्य के भीतर कई गांव, स्टेट, वन विभाग और कुमाऊं मंडल विकास निगम के विश्रामगृह स्थित हैं। इस अभ्यारण्य के चारों तरफ घनी बसासत है।
अभ्यारण्य की स्थापना के 26 साल बाद भी वन विभाग के पास इस अभ्यारण्य की न तो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) उपलब्ध है और न ही इंवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट (ईआइए)।
कुछ साल पूर्व किया गया बिनसर अभ्यारण्य के क्षेत्रफल का चिन्हांकन भी गैरकानूनी है। स्थापना के समय अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 45.59 वर्ग किमी था जिसे बढ़ा कर बाद के वर्षों में 47.07 वर्ग किमी कर दिया गया।
अभ्यारण्य की स्थापना के बाद वन विभाग जंगल की सुरक्षा करने में नाकाम रहा और जंगल तेजी से बर्बाद हुआ है। अभ्यारण्य के नियमों के कारण प्रभावित गांवों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं।
पूर्व में भी प्रदर्शन किया गया था, लेकिन मांग नहीं मानी गई। इको सेंसटिव जोन किसी भी कीमत में नहीं बनने दिया जाएगा। बाद में सिविल सोयम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में प्रधान संगठन ताकुला, वन पंचायत सरपंच संगठन ताकुला, मल्ला स्यूनरा विकास मंच, उत्तराखंड संसाधन पंचायत समेत विभिन्न संगठनों के बालम सिंह सुयाल, ईश्वर जोशी, प्रधान रघुवर जोशी, राजेंद्री देवी, चंदन सिंह बिष्ट, देव सिंह पिलख्वाल, शांति देवी, गोविंदी देवी, पीसी तिवारी, दिनेश पांडे, योगेश बाराकोटी, हरीश जोशी, पीसी तिवारी आदि शामिल थे।