राजकीय महाविद्यालय चौखुटिया उच्च शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ खिलवाड़ का बड़ा उदाहरण है। महाविद्यालय की स्थापना के चौदह साल बाद भी भवन नहीं बन पाया है। बीएससी, बीकॉम और एमए की कक्षाएं शुरू न होने से छात्र अन्यत्र पढ़ने को मजबूर हैं।
चौखुटिया में अक्तूबर 2001 में महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। 2012 में महाविद्यालय भवन के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बाद कार्य तो किसी तरह शुरू हुआ, लेकिन धीमी कार्य गति के चलते उसके पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
आज भी ग्राम पंचायत दिगौत के निकट हो रहे निर्माण स्थल पर बुनियाद और बीम खड़े करने से आगे कुछ नहीं हो पाया है, जबकि कार्य को जून 2015 में ही पूरा हो जाना था। गौरतलब है इसके साथ शुरू हुआ अन्य महाविद्यालयों का भवन निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
भवन के अभाव में महाविद्यालय टीन शेडों में संचालित हो रहा है। गत वर्ष हिंदी विषय से एमए की स्वीकृत मिली। इसमें भी प्रवक्ता न होने से एमए की कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।
जबकि बीएससी और बीकॉम की स्वीकृति न मिलने से छात्र परेशान हैं। अंग्रेजी प्रवक्ता का पद भी रिक्त है। बहरहाल करीब 450 छात्र संख्या वाले इस चौदह साल पुराने महाविद्यालय की तस्वीर देखकर देवभूमि में उच्च शिक्षा की दुर्दशा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बाक्स
हर माह भेज रहे रिमाइंडर
चौखुटिया। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डा. जेएस रावत का कहना है कि भवन निर्माण में हो रहा विलंब सबसे बड़ी समस्या है। हर माह रिमाइंडर भेज रहे हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ रही है। जबकि भवन को गत जून में ही तैयार हो जाना चाहिए था। एमए हिंदी प्रवक्ता के जल्द नियुक्ति की संभावना है मामला उच्च शिक्षा मंत्री के संज्ञान में भी है।
फोटो...
चौखुटिया में इन्हीं टीन शेड में संचालित हो रही महाविद्यालय की कक्षाएं। (फोटो19एएलएमसीएचके02पी)
चौखुटिया में ग्राम पंचायत दिगौत में महाविद्यालय का निर्माणाधीन भवन,सिर्फ बिम खड़े करने से आगे नही बढ़ पाया है कार्य। (फोटो19एएलएमसीएचके03पी)