राज्य में चाय विकास बोर्ड का नया ढांचा स्वीकृत हो गया है। चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड अब राज्य के सभी दस पर्वतीय जिलों में प्रबंधक की नियुक्ति करेगा।
गत दिनों देहरादून में बोर्ड के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बोर्ड ने चालू वित्तीय वर्ष में 600 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय पौध का रोपण का लक्ष्य रखा है।
चाय बोर्ड का अब तक प्रदेश में 49 कार्मिकों का ढांचा था। जिसे अब बढ़ाकर 149 कर दिया गया है। विभाग के अब तक रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, बागेश्वर, चंपावत और नैनीताल जिले में ही प्रबंधक थे।
देहरादून में गत दिनों हुई बोर्ड की बैठक से लौटकर निदेशक डा. केआर जोशी और लेखाधिकारी अनिल कुमार खोलिया ने बताया कि अब शेष चार पर्वतीय जिलों में भी प्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी।
पर्वतीय दस जिलों में सहायक प्रबंधक, सुपरवाइजडर, माली आदि के पद सृजित हुए हैं। बोर्ड के नवस्वीकृत ढांचे में सौ पद बढ़ जाने से काम में तेजी आएगी।
उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में बोर्ड का 27 करोड़ का बजट है। इसमें से 6.84 करोड़ विभाग को जारी हो गया है। बोर्ड ने प्रदेश में 600 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य रखा है।
प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर स्थापित नर्सरियों में एक करोड़ पौधों की नर्सरी बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 650 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की पौध लगाई गई है।
इस वर्ष स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत धौलादेवी और मुनस्यारी में 100-100 हेक्टेयर क्षेत्र में बागान विकसित किया जाएगा।
मुनस्यारी में बोर्ड पहली बार बागान लगाने जा रहा है। नए स्थानों पर बागान लगाने के लिए मृदा परीक्षण कराया जाएगा। उपयोगी पाए जाने पर संबंधित क्षेत्रों में चाय की पौध लगाई जाएगी।