अगनेरी मंदिर परिसर में हो रहे चैत्राष्टमी मेले के चौथे दिन अल्मोड़ा के कलाकारों की धूम रही। हिमालयन संस्कृति लोक कला मंच अल्मोड़ा के कलाकारों ने चौखुटिया बाजारा हुड़की बाजी रे छम और उत्तराखंड देव भूमि तेरी जयजय कारा सहित कई लोक नृत्य प्रस्तुत किए। संस्कृति विभाग से आई पूरन बोरा और साथियों की टीम ने छोलिया नृत्य के साथ ही पिरामिड बनाकर लोगों का दिल जीत लिया।
बोरा की टीम ने छपेली, झौड़ा और चांचरी के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति का परिचय कराया। योगिता जोशी, श्रेया नेगी और आस्था जोशी ने अपने एकल नृत्य से खूब वाहवाही लूटी। मदन कन्याल ने बंदरों के आतंक से बर्बाद होती खेती को इंगित करते हुए कुमाऊंनी कविता गुणीं बानरों ले उज्याड़ी है छ गौं तुम बताओ नेताजी हम कथा हैं जों (बंदर, लंगूर ने गांव के गांव उजाड़ दिए है नेताजी तुम ही बताओ हम कहां जाएं)। इस मौके पर मेला कमेटी के अध्यक्ष दयाल मेहरा, संयोजक डा. कुलदीप बिष्ट, डा. विवेक पंत, बालादत्त तिवारी, विजय पांडे, एलडी मठपाल, जगत नेगी, जीवन नेगी, लीला जोशी व जसीराम आदि मौजूद थे। संचालन जीवन मेहरा ने किया।
उधर मेला परिसर में लगे चर्खों और मिकी माउस आदि में बच्चों की भीड़ लगी हुई है। लोगों ने मेला परिसर में लगी दुकानों में जमकर खरीददारी की।