जिले में हाल के वर्षों में सृजित नई तहसीलें कामचलाऊ व्यवस्था में चल रही हैं। उपजिलाधिकारियों के पास दो-दो तहसीलों का कार्यभार है। जिले की ग्यारह तहसीलों में से चार में ही तहसीलदार तैनात हैं। जिला मुख्यालय समेत शेष सात तहसीलों में नायब तहसीलदारों के पास चार्ज है। नवसृजित तहसीलों में स्टाफ का भी अभाव बना हुआ है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिले में अल्मोड़ा, रानीखेत, मौलेखाल, सोमेश्वर, जैंती, गरुड़ाबांज, भिकियासैंण के अलावा हाल के सालों में द्वाराहाट, चौखुटिया, मछोड़ तहसील सृजित की गईं, जबकि धौलछीना तहसील की घोषणा की गई है, लेकिन यह तहसील अब तक अस्तित्व में नहीं आई है। जिले को छह सब डिवीजनों में बांटा गया है। छह उपजिलाधिकारियों के पास दो-दो तहसीलों का प्रभार है। हाल के सालों में खुली नई तहसीलों में कार्यालय स्टाफ का भी अभाव बना हुआ है।
ग्यारह तहसीलों में से मात्र रानीखेत, मौलेखाल, भिकियासैंण और सोमेश्वर में ही तहसीलदार तैनात हैं।
जिला मुख्यालय समेत अन्य सात तहसीलों में तहसीलदार के पदों पर प्रभारी व्यवस्था चल रही है। इन तहसीलों में नायब तहसीलदारों के पास तहसीलदारों का प्रभार है। हाल में सृजित तहसीलों और उप तहसीलों के कार्यालय भवन अब तक नहीं बन सके हैं, वहीं सरकार ने स्याल्दे, लमगड़ा, ध्याड़ी और जालली को भी उपतहसील बना दिया है, लेकिन संसाधनों के अभाव में इनका लाभ भी जनता को नहीं मिल पा रहा है। नवसृजित तहसीलों में अधिकारियों और कर्मचारियों के कई पद रिक्त चल रहे हैं, जिस कारण क्षेत्रीय जनता के तहसीलों और उपतहसीलों में जरूरी कार्य नहीं हो पाते हैं।