उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे के पेंच से अल्मोड़ा स्थित आवास विकास परिषद के प्लाटों का आवंटन अधर में लटक गया है।
तीन साल पहले 44 प्लाटों के लिए करीब पांच करोड़ रुपये जमा करने के बावजूद लोगों को भूमि का आवंटन नहीं हुआ है। नाराज लोगों ने शनिवार को बरेली से अल्मोड़ा पहुंचे आवास विभाग के अधिकारियों को घेर लिया और कई घंटे तक मौके से नहीं जाने दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1980 के दशक में तल्ला चीनाखान में करीब 200 नाली भूमि का अधिग्रहण कर आवास और विकास परिषद को आवंटित की। आवास विकास परिषद ने इस भूमि में कई भवनों का निर्माण कर लोगों को आवंटित कर दिया।
इसके बावजूद भी यहां काफी भूमि खाली बच गई। आवास विकास परिषद ने जनवरी 2013 में खाली पड़ी भूमि में 44 प्लाटों की नीलामी को निविदा जारी की।
अलग-अलग साइज के प्लाटों की कीमत आठ से लेकर 18 लाख तक थी। क्षेत्र के 44 खरीददारों ने लखनऊ जाकर कुल कीमत का 90 फीसदी भुगतान फरवरी 2013 में आवास विकास परिषद लखनऊ में जमा करा दिया, लेकिन राज्य गठन से पूर्व की परिसंपत्तियों पर उत्तराखंड सरकार ने अपना अधिकार बताते हुए भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी।
इसके चलते भूमि आवंटन का मामला अधर में लटक गया है। तब से प्लाटों के लिए धन जमा करा चुके खरीददार परेशान हैं।
शनिवार को आवास विभाग के सहायक अभियंता मनोज कुमार गुप्ता और अवर अभियंता जेएस डसीला विभाग के अल्मोड़ा स्थित कार्यालय पहुंचे थे। अधिकारियों के पहुंचने की भनक लगते ही काफी लोग चीनाखान स्थित कार्यालय आ धमके। उन्होंने नारेबाजी कर विरोध जताया और पांच घंटे से अधिक समय तक अधिकारियों का घेराव किया।
लोगों ने तत्काल प्लाट आवंटित करने की मांग की। इसके बाद अधिकारियों ने फोन पर लखनऊ बैठे उच्चाधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों ने आवंटियों को 11 नवंबर को बरेली में वार्ता के लिए बुलाया।
इसके बाद लोगों ने घेराव समाप्त किया। घेराव करने वालों में बीडीसी सदस्य दर्शन नैनवाल, दीपक पांडे, राजू वर्मा, राजेंद्र बिष्ट, गोपाल नेगी, संजय वाणी, मनोज भंडारी, मोहन ननौला, एलडी भट्ट, लक्ष्मी दत्त आदि शामिल थे।