नाबार्ड से समय पर धन नहीं मिलने पर जिले में आठ स्कूल भवनों का निर्माण दो साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। स्कूल भवनों के कुल स्वीकृत 11.53 करोड़ के विपरीत मात्र 4.61 करोड़ रुपये ही मिले हैं। इसके चलते इन स्कूल भवनों का निर्माण अधूरा है। भवन अधूरे रहने से इन स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।
प्रदेश सरकार ने 2014-15 में जीआईसी गुरुड़ाबांज स्कूल भवन के लिए 96.08 लाख, जीआईसी आरासल्पड़ के लिए 1.34 करोड़, जीआईसी दन्यां के लिए 1.66 करोड़, भेटाबडौली के लिए 1.93 करोड़, जीआईसी मेरगांव 2.02 करोड़, जीआईसी आनुली के लिए 1.39 करोड़, जीआईसी खेती के लिए 1.13 करोड़, वर्ष 2015-16 में राजकीय हाईस्कूल ज्यूड़ कफून के लिए 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। सरकार ने इन स्कूलों के लिए नाबार्ड से फंडिंग की है, लेकिन स्कूल भवन बनाने को अब तक पूरा धन जारी नहीं हुआ है। जिस कारण स्कूल भवनों का काम अधर में है।
गुरुड़ाबांज स्कूल भवन के लिए 47.90 लाख, आरासल्पड़ के लिए 63.46 लाख, दन्यां के लिए 76.28 लाख, भेटाबड़ौली के लिए 86.56, मेरगांव के लिए 90.10 लाख, आनुली स्कूल के लिए 65.25 लाख, खेती के लिए 55 लाख रुपये की मिले हैं। इन स्कूल भवनों का निर्माण ग्रामीण निर्माण विभाग का अल्मोड़ा डिवीजन कर रहा है, जबकि पेयजल निगम द्वारा निर्माणाधीन राजकीय हाईस्कूल ज्यूड़ कफून के लिए 48.75 लाख रुपये ही मिले हैं। नाबार्ड द्वारा शेष 6.92 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त नहीं होने से स्कूल भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। जबकि 2014-2015 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) से जीआईसी देवीथल, जैंती और भनोली स्कूल भवनों के लिए 3.15 करोड़ रुपये ग्रामीण निर्माण विभाग को मिल चुके हैं। इनमें से जैंती स्कूल भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जबकि देवीथल और भनोली के भवन का कार्य प्रगति पर है।