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लोन फर्जीवाड़े में दो को सात-सात साल का कारावास

Wed, 26 Apr 2017 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन सिंह ने फर्जी कागजात के जरिये पिता के नाम से एसबीआई धौलादेवी से ऋण लेने वाले एक व्यक्ति और मिलीभगत में शामिल बैंक फैसिलिटैटर को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 35-35 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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गैराड़ गांव निवासी जगत सिंह ने अपने पिता बहादुर सिंह के नाम से एसबीआई धौलादेवी से किसान क्रेडिट योजना के तहत 8 मार्च 2011 को 50 हजार रुपये का ऋण लिया। जगत सिंह ने ऋण आवेदन में पिता के स्थान पर अपना फोटो लगाया और पिता के फर्जी कागजात लगाए। इसमें बैंक के  फैसिलिटैटर पूरन चंद्र पांडे पुत्र टीका राम, निवासी ग्राम चिमार्ख तापणी की भी मिलीभगत रही।

बैंक में ऋण जमा नहीं होने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो तत्कालीन बैंक मैनेजर प्रिंस कुमार ने राजस्व पुलिस काफली में दोनों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया। विवेचना  के बाद राजस्व उप निरीक्षक नवीन चंद्र सनवाल ने आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी अरुण गौड़ ने सात गवाह परीक्षित कराए।
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न्यायालय में दोनों आरोपियों पर धारा 420, 467, 468 और 471 में आरोप सिद्ध हुआ। दोनों आरोपियों को धारा 420 में तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास, 10-10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 467 में सात-सात साल कठोर कारावास और 10-10 हजार जुर्माना, धारा 468 में तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास तथा धारा 471 में तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास, 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर विभिन्न धाराओं में तीन से छह माह की साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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