Two parties beat up at the polling station, fighting
अल्मोड़ा। जिले में ब्लाक प्रमुख की कुल 11 सीटों में से कांग्रेस ने छह पर कब्जा करके भाजपा को करारा झटका दिया है। भाजपा को सिर्फ दो ही सीटों पर संतोष करना पड़ा। जबकि तीन सीटों पर निर्दलियों ने कब्जा कर लिया। दो सीटों पर भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे। वहीं आठ ब्लाकों में हुए चुनाव में भाजपा को कोई सीट नहीं मिली।
ब्लाक प्रमुख चुनाव में भाजपा को सबक दे गए हैं वहीं यह चुनाव काफी लंबे समय बाद कांग्रेस को राहत देने वाले रहे। बता दें कि जिले के कुल 11 विकासखंडों में से भिकियासैंण, द्वाराहाट, रानीखेत, भैंसियाछाना, सल्ट व स्याल्दे में कांग्रेस, हवालबाग, चौखुटिया व लमगड़ा में निर्दलीय प्रत्याशी और धौलादेवी व ताकुला ब्लॉक में भाजपा ने जीत हासिल की है। धौलादेवी और ताकुला में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे जबकि बुधवार को हुए आठ ब्लॉकों प्रमुखों के लिए हुए चुनाव में भाजपा एक भी सीट पर विजय नहीं मिल सकी। कांग्रेस प्रत्याशियों के साथ ही स्थानीय नेताओं ने भी बीडीसी सदस्यों का समर्थन हासिल करने के लिए काफी मेहनत की। यह माना जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशियों और रणनीतिकारों के अति आत्मविश्वास के चलते भी कई सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा से ज्यादा सटीक रणनीति निर्दलीय प्रत्याशियों की रही जिन्होंने अपने दम पर जिले में तीन सीटें हासिल कर ली।
सल्ट में आज तक कांग्रेस का ही रहा ब्लाक प्रमुख
मौलेखाल (अल्मोड़ा)। सल्ट विकासखंड में ब्लाक प्रमुख पद पर आज तक कभी भी भाजपा का प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर सका। 1961 में ब्लॉक का गठन होने के बाद से ही इस सीट पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों का कब्जा रहा। यहां 1961 से 62 तक दान सिंह, 62 से 71 तक गोविंद सिंह फिर 1972 से 1998 तक मोहन सिंह ब्लाक प्रमुख रहे। 1999 के चुनाव में भी कांग्रेस समर्थित कमला रावत ने जीत दर्ज की वह 2002 तक प्रमुख रही। 2003 में कांग्रेस के बलवंत सिंह रावत ने जीत दर्ज की वह 2008 तक इस पद पर रहे। 2008 में बीना रावत ब्लाक प्रमुख बनी, वह 2014 तक इस पद पर रही। 2014 में मुन्नी आर्या विजयी रही। वह इस पद पर 2019 तक रही इस बार यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक रणजीत रावत के पुत्र विक्रम रावत इस सीट पर काबिज हुए हैं।
लमगड़ा में भी पार्टी का निर्णय भारी पड़ा
लमगड़ा (अल्मोड़ा)। लमगड़ा की ब्लाक प्रमुख सीट पर यदि भाजपा ने विक्रम बगडवाल को प्रत्याशी बनाया होता तो सीट भाजपा के हाथ से नहीं जाती। बताया जाता है कि संख्या बल का पता होने के बावजूद पार्टी के कुछ नेताओं ने जगदीश बिष्ट को ही प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस पर विक्रम बगडवाल बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में आ गए और यहां भाजपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर चला गया।