रानीखेत का ट्रामा सैंटर, इसी में संचालित होगा महिला अस्पताल। संवाद न्यूज एजेंसी
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। उपमंडल क्षेत्र के एकमात्र राजकीय अस्पताल में जच्चा बच्चा अस्पताल शीघ्र अस्तित्व में आने की उम्मीद है। पिछले एक दशक से डॉक्टरों का आवास बने ट्रॉमा सेंटर के भवन को इसके लिए खाली करा लिया गया है। ट्रॉमा सेंटर का संविलियन मुख्य अस्पताल के साथ हो गया है। अब गाइनो वार्ड, ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट, प्रसूति कक्ष इसी भवन में शिफ्ट होंगे। उपमंडल क्षेत्र की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं के मद्देनजर यहां ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था लेकिन न तो यहां डॉक्टर पहुंचे और न ही उपकरण।
राजकीय अस्पताल में वर्ष 2000 में एक करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर स्वीकृत हुआ। भवन बनने के बाद 2009 में तत्कालीन भाजपा सरकार के सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अल्मोड़ा में भवन का लोकार्पण कर दिया, लेकिन, सरकार संसाधन, उपकरण और डॉक्टर जुटाने में नाकामयाब रही। इसके बाद आई सरकारें भी ट्रॉमा सेंटर के शीघ्र संचालित होने के सब्जबाग दिखाती रही लेकिन कोई प्रगति नहीं। अब ट्रॉमा सेंटर इस अस्पताल में जच्चा बच्चा अस्पताल संचालित किया जाएगा। प्रसूति कक्ष की हालत खराब थी। अधीक्षक डॉ. डीएस नेई ने बताया कि गाइनो वार्ड, प्रसूति कक्ष समेत ऑक्सीजन प्लांट भी यहीं संचालित होगा। यह संयुक्त अस्पताल है। अब यहां महिला अस्पताल भी संचालित हो जाएगा। इसकी शुरुआत कर दी गई है।
ट्रॉमा सेंटर खाली था, यहां डॉक्टर और स्टाफ अस्थायी तौर पर रह रहे थे। अब भवन को खाली करवा दिया गया है। नए स्टाफ क्वार्टर बन रहे हैं। कुछ महीने बाद आवास आवंटित कर दिए जाएंगे। ट्रॉमा सेंटर अब महिला अस्पताल के रूप में संचालित होगा। इससे काफी सुविधाएं मिलेंगी।
- डॉ. डीएस नेई, सीएमएस, राजकीय अस्पताल रानीखेत।