सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की अदालत ने पति की हत्या के मामले में उसकी पत्नी समेत तीन को दोषी करार दिया। 18 मार्च को सजा सुनाई जाएगी। चंडीगढ़ में नौकरी करने वाले देवलीखान निवासी पूरन चंद्र जोशी ने प्राथमिकी में कहा था कि 29 मई 2018 को रात करीब दो बजे भाई सुरेश चंद्र जोशी की पत्नी नेहा जोशी का उन्हें चंडीगढ़ में फोन आया। नेहा ने बताया कि सुरेश रात आठ बजे पैसे के सिलसिले में किसी के यहां गए थे। साथ ही बीमार भैरव दत्त को भी देखकर आने की बात कही थी, लेकिन वो अभी तक घर नहीं लौटे हैं। इसके बाद पूरन चंद्र जोशी की बेटी ने भाई सुरेश चंद्र जोशी के मोबाइल पर फोन किया तो फोन नेहा ने उठाया और वह सकपका गई। इसके बाद नेहा ने ग्राम प्रधान कमला जोशी से बात कराई।
ग्राम प्रधान ने बताया कि सुरेश चंद्र जोशी का शव विनायक तोक में पड़ा है। चंडीगढ़ से पूरन चंद्र जोशी 30 मई की रात गांव पहुंचे। 31 मई को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक जून को पूरन चंद्र जोशी ने नेहा से ग्राम प्रधान के अलावा दो अन्य व्यक्तियों के सम्मुख भाई की मौत के बारे में पूछा। नेहा ने कबूला कि उसने घनश्याम उर्फ गोलू और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी है। नेहा ने बताया कि घनश्याम जोशी उर्फ गोलू से अवैध संबंधों को लेकर पति शक करता था और झगड़ता था।
मृतक के भाई ने मामले की प्राथमिकी राजस्व उप निरीक्षक शीतलाखेत के यहां दर्ज कराई। विवेचना के बाद पुलिस ने नेहा जोशी पत्नी स्व. सुरेश चंद्र जोशी, सोनू उर्फ शंकर दत्त बैला पुत्र अंबा दत्त निवासी देवलीखान (शीतलाखेत) और घनश्याम उर्फ गोलू पुत्र भवानी दत्त कांडपाल निवासी ग्राम बसर (कठपुड़िया) को अदालत में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।
मामले का विचारण सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में हुआ। अदालत ने तीनों को धारा 302, 201 में दोषी पाया। आरोपियों को सजा सुनाने के लिए न्यायालय ने 18 मार्च की तिथि तय की है। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गिरीश फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) शेखर चंद्र नैल्वाल और हरीश मनराल, विशेष लोक अभियोजक भुपेंद्र कुमार जोशी ने न्यायालय में 14 गवाह परीक्षित कराए।