पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी के संचालक पूरी तरह से मनमानी पर उतर आए हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य केंद्र में साढ़े ग्यारह बजे तक 12 में से सिर्फ दो ही डाक्टर मौजूद मिले। उस पर भी एक डाक्टर चंद मिनट पहले पहुंची थीं।
निरंकुश हो चुके प्रबंधकों को न मरीजों की परवाह है और न ही शासन की। डाक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर उठने वाले सवालों का तर्क संगत जवाब किसी के पास नहीं है। हालत यह है कि हर माह लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीज उपचार के लिए भटक रहे हैं।
शुक्रवार को अमर उजाला द्वारा 11.30 बजे किए गए निरीक्षण के दौरान सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सी खाली मिली। जबकि एनस्थेटिक, नेत्र चिकित्सक, मेडिकल आफिसर द्वितीय भी नदारद मिले।
सरकारी तौर पर तैनात स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डा.अमजद खान मरीजों को देख रहे थे। जबकि महिला रोग विशेषज्ञ उसी समय पहुंची थीं।
डीजी स्वास्थ्य के साथ 14 मई 2013 को हुए शील नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड के अनुबंध के आधार पर पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी में एक जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, एनिथिसिया, आई सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ और दो जनरल ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी सहित कुल 12 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अनिवार्य है।
तैनात डाक्टरों को पांच साल का अनुभव होना भी अनिवार्य है, परंतु प्रबंधकों द्वारा अनुबंध की खिल्ली उड़ाने की कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।