हिमालयी शोध छात्र संगोष्ठी के समापन मौके पर मौजूद वैज्ञानिक ।
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जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान में कोसी कटारमल में आयोजित संगोष्ठी के समापन पर वक्ताओं ने शोध कार्यों में गुणवत्ता बढ़ाने और तथ्यपरक शोध पर काम करने पर जोर दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे शोधार्थियों ने शोध कार्यों की प्रस्तुति दी और विषय विशेषज्ञों ने उन्हें आवश्यक सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि शोध कार्य में कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होता और सतही कार्य कई सालों बाद भी शोध पर सवाल खड़ा कर सकता है।
समापन मौके पर विशेषज्ञों ने हिमालयी राज्यों विशेषकर उत्तराखंड में भी आर्किड प्रजातियों के संरक्षण और संकलन करने पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने पादप, प्राणी जगत में शोध कार्यों को और विस्तार देने के सुझाव दिए। संस्थान के निदेशक प्रो. आरएस रावल ने कहा कि भारतीय हिमालयी भू-भाग अपार संभावनाओं से भरा है और युवाओं को अपने क्षेत्रों में गहन अनुसंधान पर जोर देना चाहिए। मिशन के नोडल अधिकारी किरीट कुमार ने शोधार्थियों से मूल्यांकन को गंभीरता से लेने और शोध कार्य में गुणवत्ता लाने का आह्वान किया। समापन मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल, इंद्रप्रस्थ विवि दिल्ली के प्रो. जेके गर्ग, बीएसआई के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके सिंह, माउंटेन डिविजन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुब्रत बोस, वन्य सर्वेक्षण संस्थान देहरादून के डॉ. सौरभ घोष एवं जम्मू कश्मीर के डॉ. खुर्शीद अहमद, तितली शोध संस्थान भीमताल के पीटर स्मेटसेक, डॉ. अनीता पांडे और जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डॉ. ललित कुमार शर्मा ने विभिन्न शोध कार्यों का मूल्यांकन किया। संगोष्ठी में विभिन्न छात्रों ने पोस्टर प्रदर्शिनी में भी प्रतिभाग किया और उत्कृष्ट पोस्टर प्रदर्शिनी एवं प्रस्तुतिकरण के लिए शोधार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया। संगोष्ठी में डॉ. अनीता पांडे, डॉ. जीसी एस नेगी, डॉ.चंद्रशेकर, डॉ. रजंन जोशी, डॉ. संदीपन मुखर्जी, डॉ. आशुतोष तिवारी, डॉ. आईडी भट्ट, डॉ. सुमित राय, डॉ. ललित गिरी, डॉ. रवींद्र वर्मा, पुनीत सिराड़ी, डॉ. हर्षित पंत, अंकित धनै मौजूद रहे। हिमाॅंचल, गुवाहाटी, देहरादून, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, गंगटोक आदि 14 से अधिक शोध संस्थानों के प्रतिभाग किया।