ऐना-भिटारकोट-जाख मोटर मार्ग पर पुल का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को इस मोटर मार्ग का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जीरो बैलेंस खाता खोलने के लिए बैंक पहुंचने तक एक ग्रामीण को पांच सौ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। अधूरी सड़क के कारण ग्रामीण पलायन करने को विवश हैं। पिछले छह सालों में भिटारकोट गांव से ही 40 परिवार पलायन कर चुुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन उसके बाद शक्ल तक नहीं दिखाते।
तहसील के सुदूरवर्ती क्षेत्र भिटारकोट, कुलसीबी, बगथल, नैड़ी, बूंगा, भाड़ी, जाख सहित आठ गांवों को जोड़ने के लिए 2011 में ऐना-भिटारकोट-जाख 20 किमी सड़क को मंजूरी मिली। ऐना से लेकर भिटारकाट आठ किमी सड़क एक साल के भीतर कट चुकी थी, लेकिन भाड़ी के पास मल्यालनदी के ऊपर पुल नहीं बनने के कारण इस मोटर मार्ग का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। पुल नहीं बनने से मोटर मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। ग्रामीणों को आज भी आठ से 10 किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है।
सड़क का लाभ नहीं मिलने के कारण इन गांवों से पलायन हो रहा है। इस क्षेत्र में बैंक की शाखाएं नहीं हैं। यदि किसी ग्रामीण ने जीरो बैलेंस का खाता खोलना है तो उसे 20 किमी दूर मजखाली आना पड़ता है। जिसमें उसे 500 रुपए खर्चने पड़ते हैं। ग्रामीण गोविंद सिंह नेगी का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण पलायन कर रहे हैं, 200 मवासे वाले भिटारकोट गांव से ही 40 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं, पर्वतीय क्षेत्र के विकास का नारा देने वाले जनप्रतिनिधियों को जन सरोकारों से कोई लेना देना नहीं है।