स्याल्दे (अल्मोड़ा)। नौ नवंबर को उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई और यह प्रदेश अब युवा भी हो गया है, लेकिन 25 वर्षों बाद भी प्रदेश के कई गांव मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। इन गावों में से स्याल्दे विकासखंड के दुरुस्त नैल, कटपतीया, गगनौला, तिमलिढ़या, तल्ली बाखली, ठाड़ीधार, नौगांव कई गांव ऐसे हैं जो अभी भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। आज भी यहां के लोग गर्भवतियों और गंभीर मरीजों को ग्रामीण डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं।
इन गांवों में रह रही करीब दो हजार की आबादी को सड़क तक पहुंचने के लिए जोखिम भरे रास्तों से पैदल चलना पड़ता है। भले ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के नाम पर कई दावे हो रहे हो, लेकिन स्याल्दे ब्लॉक के इन गांवों में ये दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। विकासखंड के दुरुस्त नैल, कटपतीया, गगनौला, तिमलिढ़या, तल्ली बाखली, नौगांव, ठाड़ीधार आदि गांवों की आबादी करीब दो हजार है। सड़क न होने ये सभी लोग परेशान हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि समस्या तब अधिक बढ़ जाती है जब इन गांवों में किसी गर्भवती या गंभीर मरीज को उपचार की जल्द जरूरत होती है। तब डोली ही उनका एकमात्र सहारा होता है। ग्रामीण डोली के सहारे गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं। मूलभूत सुविधा नहीं होने से इन गांवों में लगातार पलायन हो रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजीएसवाई योजना के तहत सड़क का सर्वे पूरा हो चुका है। सड़क अभी तक नहीं बन पाई है।