शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के चलते अब 10 अथवा 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद नहीं किया जाएगा। कोई भी स्कूल छात्र संख्या शून्य हो जाने पर ही बंद किया जाएगा। हालांकि दस से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात रहेगा। अल्मोड़ा जिले में 10 से कम छात्र संख्या वाले 341 स्कूल हैं। इनमें 200 से अधिक स्कूलों में दो-दो शिक्षक तैनात हैं। दस से कम छात्र संख्या वाले कुछ स्कूलों में तो तीन शिक्षक तक तैनात हैं। अब इन विद्यालयों में तैनात अतिरिक्त 212 शिक्षकों को एक माह के भीतर अन्य स्कूलों में समायोजित किया जाएगा।
बता दें कि पूर्व में सरकार ने दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद करने का फैसला कर लिया था। यह तय हुआ था कि 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को निकट के अन्य विद्यालयों में पढ़ने भेजा जाएगा। जबकि यहां तैनात शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में स्थानांतरित करने का फैसला हुआ था, लेकिन सरकार के इस फैसले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम आड़े आ गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में निहित प्रावधानों के मुताबिक जब तक किसी भी विद्यालय में एक छात्र भी अध्ययरत रहेगा तो उसे वहां से नहीं हटाया जा सकेगा। इस तरह जब तक छात्र संख्या शून्य नहीं हो जाए तब तक किसी स्कूल को बंद नहीं किया जा सकेगा। हालांकि मानकों के मुताबिक 10 अथवा इससे कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक की तैनाती रहेगी।
अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षाधिकारी जगमोहन सोनी ने बताया कि अल्मोड़ा जिले में स्थित 341 प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 10 अथवा दस से कम है। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मुताबिक जब तक छात्र संख्या शून्य नहीं हो जाती तब तक इन विद्यालयों को बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इनमें कई विद्यालयों में दो अथवा इससे अधिक शिक्षक तैनात हैं। इन विद्यालयों से कुल 212 शिक्षक-शिक्षिकाओं को हटाया जाना है। उन्होंने बताया कि एक माह के भीतर इन सरप्लस शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्र में सरकारी स्कूल रोजगार का प्रमुख साधन है। इन स्कूलों में शिक्षक-शिक्षिका के तौर पर हर साल सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिल रहा है लेकिन शिक्षा में गुणवत्ता की कमी के कारण जिस तरह लोगों का सरकारी स्कूलों से मोह भंग हो रहा है और छात्र संख्या लगातार घट रही है। उससे विद्यालयों में शिक्षकों की खपत भी कम होती जा रही है। इसे देखते हुए सरकार शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास जरूरी हैं। इससे एक तरफ बच्चों को कम खर्च पर अच्छी शिक्षा मिलेगी वहीं स्कूल बंद नहीं होंगे। जिससे हर साल शिक्षकों की भर्ती चलती रहेगी।