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पांच सौ से अधिक जलाशय बनेंगे

Mon, 02 Nov 2015 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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प्राकृतिक स्रोतों, नदियों का जल स्तर लगातार घटते जा रहा है। जिले में जल स्रोतों के संवर्धन, उन्हें रिचार्ज करने, जल संरक्षण के लिए जंगलों, गधेरों, प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास पांच सौ से अधिक जलाशय बनाए जाएंगे।
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ताकि बहते पानी के संरक्षण के साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों, नदियों का जल स्तर भी बढ़ सके। इसके लिए राज्य सरकार ने चार करोड़ के सापेक्ष वन विभाग को एक करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। योजना पर जल्द काम शुरू होगा।


पर्वतीय क्षेत्र में नदियों, प्राकृतिक स्रोतों नौलों, धारों में जल स्तर कम होते जा रहा है। ढलान क्षेत्र होने के कारण बरसाती पानी का भी उपयोग नहीं हो पाता है। वहीं जंगलों में नालों, गधेरों का पानी बहता रहता है।
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इस पानी के संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं बनी थी। अब वन विभाग ने इस पानी के संरक्षण, जल संवर्धन के लिए काम करना शुरू कर दिया है। वन विभाग की स्रोतों का जल स्तर बढ़ाने, जल संरक्षण की योजना है।

विभाग ने जंगलों में बहते पानी, नौलों, गधेरों, बरसाती पानी के संरक्षण की योजना तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी थी। इस बारे में मुख्यमंत्री की जल संरक्षण के लिए चाल, खाल बनाने की घोषणा के बाद गति आई।

 वन विभाग ने जल संरक्षण के लिए जंगलों, गधेरों, जल स्रोतों के आसपास जलाशय बनाने के लिए करीब चार करोड़ का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा था। उत्तरी कुमाऊं वृत्त के वन संरक्षक प्रेम कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार से वन विभाग को एक करोड़ रुपये अवमुक्त हो गए हैं।

इस धनराशि से जल संग्रहण के लिए पक्के जलाशय, चेकडैम, ट्रेंचेज बनाए जाएंगे। ताकि बरसाती पानी के साथ ही बहते पानी का भी संरक्षण किया जा सके। नवंबर दूसरे पखवाड़े से इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा।
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