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बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी

Thu, 22 Jun 2017 09:51 PM IST
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
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नेशनल प्लान ऑफ एक्शन के तहत जिला कारागार अल्मोड़ा में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कारागार में विचाराधीन बंदी अथवा सजा प्राप्त बंदियों को सुविधाएं उप्र जेल मेनुअल एक्ट के अनुसार अनुमन्य है। कारागार में पुरुष और महिलाओं के कक्ष अलग-अलग और पर्याप्त दूरी पर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जेल में डाक्टर की सुविधा होनी चाहिए। मुख्य रूप से बंदियों के चिकित्सीय इलाज कारागार के भीतर ही होने चाहिए। सजा प्राप्त बंदियों से एक दिन में नौ घंटे तक परिश्रम करवाया जा सकता है।
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जेलर मेघराज सिंह ने बताया कि जेल अधिकारी के निर्देश का पालन न करना, झगड़ा करना, गाली-गलौच करना, अनैतिक व्यवहार करना, परिश्रम करने से इंकार करना, कारागार के रिकार्ड को खराब करना आदि कृत्यों को कारागार अपराध की श्रेणी में रखा गया है। कारागार में बंदियों का दायित्व है कि वह जेल में सफाई बनाए रखें और अनुशासित रहें। जेल में बंदियों को कुछ मौलिक और संवैधानिक अधिकार हैं। पैनल लायर प्रमोद कुमार और रितेश कुमार ने बंदियों की समस्याओं को प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र के सामने रखा। इस मौके पर कैदियों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया। इससे पूर्व प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने जिला कारागार का निरीक्षण कर कैदियों के खान-पान का जायजा लिया। उन्होंने चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने और जेलर को कैदियों के समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए।
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