अल्मोड़ा। पहाड़ की सड़कों पर यातायात के नियमों के उल्लंघन करने की रफ्तार थम नहीं रही है। जहां एक ओर सरकार और प्रशासन की ओर से लगातार सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है वहीं आंकड़े बताते हैं कि लोग अब भी यातायात के नियमों को हल्के में ले रहे हैं। जिले में अक्तूबर 2024 से मार्च 2025 के बीच 5300 चालान काटे गए थे। इस साल अप्रैल से सितंबर तक के छह महीनों में यह संख्या 7268 तक पहुंच गई। यानी इन छह महिनों में यातायात के नियमों के उल्लंघन के मामलों में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इस अवधि में परिवहन विभाग ने 111.04 लाख रुपये का सम्मन शुल्क (कम्पाउंड फीस) वसूला, जो पिछली अवधि के 77.36 लाख की तुलना में 33 लाख रुपये अधिक है। इसके तहत कुल 244 वाहन जब्त किए गए, जबकि छह माह पहले यह संख्या 228 थी। अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक मामले बिना ड्राइविंग लाइसेंस, बिना टैक्स, तेज रफ्तार और बिना हेलमेट चलाने से जुड़े हैं। ओवरलोडिंग के मामले भी चिंताजनक हैं सवारी वाहनों में 356 और मालवाहक में 122 वाहन पकड़े गए। परिवहन विभाग का कहना है कि गर्मी और बरसात के मौसम में पर्यटकों और बाहरी वाहनों की संख्या बढ़ने से नियम तोड़ने के मामले अधिक होते हैं।
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बिना हेलमेट और बिना लाइसेंस सबसे आम उल्लंघन
इस साल जिले में पिछले साल की अपेक्षा बिना ड्राइविंग लाइसेंस और बिना हेलमेट वाहन चलाने के मामलों की संख्या 1,900 से अधिक रही। इससे साफ लग रहा है कि पहाड़ों में अब भी लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता कम है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल के पर्वतीय मार्गों पर पुलिस की चेकिंग के बावजूद कई लोग नियमों को सिर्फ चालान से बचने की औपचारिकता मानते हैं। संवाद
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अल्मोड़ा में परिवहन विभाग की ओर से किए गए चालान
उल्लंघन अक्तूबर 2024 से मार्च 2025 तक इस साल अप्रैल से सितंबर बढ़ोतरी प्रतिशत में
बिना ड्राइविंग लाइसेंस 1078 1284
19%
बिना टैक्स वाहन
1016
1,368 35%
ओवरस्पीडिंग
715
901
26%
बिना हेलमेट - 462
669 45%
ओवरलोडिंग (सवारी वाहन) 200 356
78%
ओवरलोडिंग (मालवाहक वाहन ) 68
122
79%
प्रेशर हॉर्न - 6
20 233%
कोट-
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों में भी सड़क सुरक्षा अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम चलाया है। हम चाहते हैं कि लोग खुद जिम्मेदारी समझें। हर नियम अपने और दूसरों की सुरक्षा के लिए है।
अनीता चंद्रा, आरटीओ अल्मोड़ा