नशा हटाओ, पलायन रोको, पहाड़ बचाओ समिति की ओर से पिछले दो माह से चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान का समापन भिकियासैंण में विशाल रैली और सभा के साथ हुआ। इस दौरान 111 ग्राम पंचायतों से हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा गया। मुख्य अतिथि पुरात्ववेता पद्श्री डा. यशोधर मठपाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए कोई कारगार नीति नहीं बन सकी है। उन्होंने कहा उत्तराखंड की देवभूमि आज माफिया भूमि बन गई है।
डा. मठपाल ने कहा कि रोजगार के लिए लघु उद्योगों की स्थापना नहीं की गई है। 70 प्रतिशत लोग गांव से रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं। उत्तराखंड में 2,80,615 घरों में ताले लटके हैं। इसमें पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों की हालत सबसे खराब है। अन्य वक्ताओं ने पहाड़ में दिनों दिन बढ़ रहे अपराध के लिए नशे को मुख्य कारण बताते हुए कहा यदि समय रहते नवयुवक नहीं जागा तो आने वाले वक्त में पहाड़ की दुर्दशा से इंकार नहीं किया जा सकता है। एलान किया गया समय रहते प्रदेश और केंद्र की सरकारों ने जनभावानाओं के अनुरूप सड़कों, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतर सुधार के साथ नशा और पलायन रोकने और रोजगार को लेकर सकात्मक नीति नहीं बनाई तो वृहद आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
इससे पहले समिति के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल के नेतृत्व में गगास पुल से जलनिगम परिसर तक विशाल रैली निकाली गई। रैली में शामिल लोग नशा और पलायन रोकने के लिए नारे लगा रहे थे। सभा और रैली में नशा हटाओ पहाड़ बचाओ समिति, महिला एकता परिषद, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर, महिला मंगल दल, पंचायत प्रतिनिधियों सहित रानीखेत, द्वाराहाट, सल्ट विधानसभा से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने भागीदारी की। सभा को प्रमोद नैनवाल, डा. एनडी कांडपाल, हिमानी नैनवाल, मोहन चन्द्र कांडपाल, मधुबाला, कुबेर कड़ाकोटी, दिनेश घुघत्याल, शंकर फुलार, मनोहर सिंह, दिवान भंडारी, मनीष सुंदरियाल, गंगा शर्मा आदि ने संबोधित किया।