जगत सिंह बिष्ट राजकीय होटल मैनेजमेंट संस्थान।
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कुमाऊं के एकमात्र जगत सिंह बिष्ट राजकीय होटल मैनेजमेंट संस्थान स्थापना के बाद से संविदा शिक्षकों के सहारे ही चल रहा है। 2005-06 से यहां प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। प्राइवेट कालेजों के लिए स्पाट काउंसलिंग होने और सरकार की बेरूखी की वजह से संस्थान में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या भी लगातार घट रही है। इस साल प्रथम वर्ष में केवल 23 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
संस्थान 1991 में अस्तित्व में आया था। होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के लिए दूर दूर से छात्र-छात्राएं यहां आकर प्रवेश लेते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में संस्थान में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसका प्रमुख कारण सरकार की बेरुखी और संस्थान में नियमित शिक्षकों की कमी से छात्र संख्या यहां कम हो रही है। कभी डेड़ सौ से ज्यादा छात्र-छात्राएं यहां पढ़ते थे वर्तमान में घटकर 111 ही रह गई है। इधर संस्थान के प्रवक्ता धीरेंद्र मर्तोलिया ने बताया कि संस्थान में प्रवक्ता के छह पदों में से पांच और सहायक शिक्षकों के छह पदों में से चार संविदा शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। संस्थान में केवल तीन शिक्षक ही नियमित हैं। प्रशासनिक अधिकारी का एक पद और लैब असिस्टेंट के सभी छह पद भी खाली चल रहे हैं। प्रधानाचार्य का पद तो 2005-06 से खाली चल रहा है। अस्तित्व में आने के बाद से संस्थान में केवल दो ही प्रधानाचार्य विभाग द्वारा नियुक्त हुए हैं। उसके बाद संस्थान का कार्यभार आईएएस, पीसीएस अधिकारियों ने ही संभाला।
संस्थान के मुख्य भवनों की छत खराब
अल्मोड़ा। होटल मैनेजमेंट संस्थान के मुख्य भवनों में आज तक पेंट नहीं हुआ है। हालत यह है कि बारिश में संस्थान के दोनों भवनों की छत टपकती रहती है। सरकार और प्रशासन को भी होटल मैनेजमेंट की याद विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान ही आती है। मालूम हो कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान होटल मैनेजमेंट संस्थान को मतगणना कार्य के लिए प्रशासन अपने नियंत्रण में रखता है। चुनाव संपन्न होने के बाद संस्थान की दुर्दशा की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।
कोट- नियमित शिक्षकों के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। संस्थान के भवन का सुधारीकरण कार्य और बाउंड्रीवाल का काम जल्द शुरू कर दिया जाएगा। मयूर दीक्षित, मुख्य विकास अधिकारी और प्रभारी, होटल मैनेजमेंट संस्थान,अल्मोड़ा।