अखरोट का उत्पादन कर काश्तकार अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। जिले की जलवायु अखरोट के लिए उपयुक्त है। उद्यान विभाग और वन विभाग काश्तकारों को अखरोट के उद्यान स्थापित करने के लिए निशुल्क पौध उपलब्ध कराने के साथ ही तकनीक सहायता भी उपलब्ध करा रहा है।
पूर्व तक पर्वतीय क्षेत्र में काठी अखरोट का उत्पादन होता था, लेकिन अब उद्यान विभाग और वन विभाग की जायका परियोजना के अंतर्गत काश्तकारों को अखरोट उत्पादन के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। चार हजार फुट से पांच हजार फुट की ऊंचाई वाले क्षेत्र अखरोट उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। जिले में 2800 हेक्टेयर क्षेत्र अखरोट के पेड़ों से आच्छादित है।
अखरोट उत्पादन के लिए जिले की जलवायु अच्छी है। विभाग द्वारा काश्तकारों को कागजी अखरोट के पौध उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कागजी अखरोट का पेड़ चार साल में फल देने लगता है। बंदर भी अखरोट को कम नुकसान पहुंचाते हैं।
वन विभाग भी उपलब्ध करा रहा काश्तकारों को पौध
अल्मोड़ा। वन विभग द्वारा उत्तराखंड वन संसाधन परियोजना (जायका) के द्वारा कोसी, गणानाथ और जागेश्वर रेंज में काश्तकारों को निशुल्क 750 कागजी अखरोट के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं। वन विभाग ने यह पौधे केंद्रीय शीतोषण संस्थान जम्मू कश्मीर से मंगाए हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 150 पौधों का रोपण किया जाता है। जायका की मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव ज्योत्सना ने बताया कि काश्तकारों की भूमि में अखरोट के पौधों का रोपण कर उन्हें तकनीकी सहायता विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।
अखरोट उत्पादन के लाभ
- अखरोट के पेड़ में नहीं लगती जल्द बीमारी।
- अखरोट का फल जल्द खराब नहीं होता।
- पैकिंग की भी जरूरत नहीं, बोरे में भरकर विपणन के लिए ले जाया जा सकता है।