डीएम सविन बंसल ने जिले के जियोग्राफिकल गवर्नेंस सेल का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस सेल में 22 विभागों की सूचनाएं संकलित कर डाटाबेस तैयार किया गया है। इन सूचनाओं से जिले के समुचित विकास, बेहतर प्रबंधन, नियोजन के साथ ही आपदा प्रबंधन में भी सहयोग मिलेगा। जी-गर्वनेंस में अल्मोड़ा प्रदेश का अग्रणी जिला बन गया है।
विकास भवन में हुए कार्यक्रम में डीएम ने जी-गवर्नेंस सेल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं और सरकारी विभागों के अभिलेखों से संबंधित सूचनाओं को जीआईएस के माध्यम तैयार किए जाने का अभिनव प्रयोग शुरू किया गया है।
साथ ही ब्लॉक स्तर पर प्रथम चरण में ताड़ीखेत, द्वाराहाट शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने विभागों से संबंधित सूचना को अपडेट कर जीआईएस सेल के माध्यम से अपलोड करें। सूचना संकलित करने के लिए जल्द ही जिला मुख्यालय में कार्यालय स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि जी-गवर्नेंस सेवा शुरू करने वाला अल्मोड़ा प्रदेश में पहला जिला है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेचुरल रिसोर्सेस डाटा मैनेजमेंट सिस्टम इन उत्तराखंड के निदेशक प्रो. जेएस रावत ने कहा कि लोनिवि, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा, राजस्व, निर्वाचन, पेयजल, खाद्य आपूर्ति, पुलिस समेत 22 विभागों के नियोजन, प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जी-गवर्नेंस तकनीक अपनाना बड़ी उपलब्धि है। इस तकनीक को अपनाने से विकास योजनाओं का बेहतर प्रबंधन, नियोजन, मानव संसाधनों की कमी दूर करने के साथ ही आपदा काल में प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई हो सकेगी। केंद्र पोषित योजना के तहत एसएसजे परिसर में जी-गवर्नेंस को लेकर 2009 से काम शुरू हुआ।
वर्तमान में जिले के 22 विभागों की सूचनाएं संकलित कर डाटा बेस तैयार किया गया है। वैज्ञानिक विनोद रावत ने पावर प्वाइंट के माध्यम से जानकारी दी। इस मौके पर एसडीएम रिंकू बिष्ट, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी, जीआईएस विशेषज्ञ नवनीत गहलवाल, नरेश पंत, यूएस नेगी, एनएल कन्नौजिया, बबीता कन्नौजिया आदि मौजूद थे।