छह माह बाद पेड़ को नया जीवन मिल गया है। संवाद
अल्मोड़ा। चौखुटिया नगर पंचायत क्षेत्र में छह माह पूर्व पार्किंग, सौंदर्यीकरण और शौचालय निर्माण के दौरान काटे गए सैकड़ों वर्ष पुराने पीपल के पेड़ को हिमगिरि वॉरियर्स संस्था ने विशेष उपचार देकर नया जीवन दिया है। पेड़ कटने के बाद क्षेत्र में विवाद और विरोध हुआ था लेकिन धीरे-धीरे सबकी यादों से यह घटना मिट गई।
इसी बीच पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत हिमगिरि वॉरियर्स ने इस पेड़ को बचाने का बीड़ा उठाया। संस्था के सदस्यों ने चौबटिया में विकसित चरबटिया पेस्ट का उपयोग कर कटे पीपल के घावों को भरने का कार्य शुरू किया। छह माह की निरंतर मेहनत के बाद अब यह वृक्ष फिर से हरा-भरा दिखने लगा है। नियमित पानी, दवा और पोषक तत्वों की आपूर्ति से पेड़ में फिर से अंकुर फूटने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने हिमगिरि वॉरियर्स के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक कदम बताया है।
हिमगिरि वॉरियर्स के शंकर सिंह बिष्ट ने कहा कि पर्यावरण को बोझ नहीं, वरदान समझना चाहिए। यदि हम इसे सुरक्षित रखेंगे तो आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकेंगी। प्रदूषण से बचाव ही सच्ची सेवा और देशभक्ति है।
ऐसे बनता है चरबटिया पेस्ट
कवकनाशी चरबटिया पेस्ट 800 ग्राम कॉपर कार्बोनेट, 800 ग्राम रेड लेड ऑक्साइड और अलसी के तेल के मिश्रण से बनाया जाता है। इसके इस्तेमाल से कट चुके पेड़ों को नया जीवन मिलता है।