सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा को स्वच्छ और सुंदर बनाने का सपना अधर में है। पिछले नौ साल से शहर में सीवर लाइन बिछाने का काम अधूरा है। नगर के मात्र एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन पड़ी है। कांग्रेस सरकार का भी पांच साल का कार्यकाल पूरा होने को है पर इस सरकार ने भी अधूरी पड़ी सीवर लाइन का काम पूरा करने लिए बजट अवमुक्त नहीं किया।
नगर पालिका क्षेत्र में लगभग सत्तर हजार आवादी निवास करती है। चौदह साल पहले शहर में सीवर लाइन को मंजूरी मिली थी। नगर को चार जोन में बांटकर सीवर लाइन बिछाना प्रस्तावित किया गया। उप्र की निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने 2002 में 6.10 करोड़ रुपए से प्रथम जोन के अंतर्गत हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, राजपुर, मकेड़ी में सीवर लाइन बिछाई और कनेक्शन दिए। 2005 में जल निगम सर्वे शाखा ने 8.10 करोड़ लागत से दूसरे चरण में तृतीय जोन का काम शुरू किया। सरकार से 4.85 करोड़ रुपये अवमुक्त होने के बाद तृतीय जोन में पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, चंपानौला, खोल्टा, सांई बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानी खोला मोहल्लों में लाइन बिछाई। इसके बाद आगे के निर्माण के लिए 2007 से पैसा नहीं मिला।
बजट नहीं मिलने से तीसरे जोन के अवशेष हिस्से थपलिया, जोशीखोला समेत मोहल्लों में लाइन डालने, रोडवेज के पास पंप हाउस और पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का काम अधर में लटका हुआ है। दूसरे और चौथे जोन का कार्य भी नहीं हुआ है। शासन के निर्देश पर जल निगम द्वितीय निर्माण शाखा ने सीवर लाइन के अवशेष कार्य के लिए 27 करोड़ 77 लाख 35 हजार का आगणन बनाकर भेजा था। इसे टेक्निकल एप्रूवल कमेटी (टीएसी) और वित्त समिति ने छह माह पहले ही मंजूरी दे दी है। पर विभाग को पैसा नहीं मिला है।
जल निगम की द्वितीय निर्माण शाखा के अधिशासी अभियंता नेबु लाल कहते हैं कि सीवर लाइन का इस्टीमेट मई 2015 में शासन को भेजा गया था। बजट अवमुक्त करने के लिए शासनादेश नहीं हुआ है। जिसके चलते अब तक धन अवमुक्त नहीं हो पाया है।