शहर में धर्मशाला नहीं होने से राहगीरों को दिक्कत होती हैं। गरीब मुसाफिरों को महंगे होटलों में रात बितानी पड़ती है। कुछ साल पहले जीर्ण-शीर्ण होने पर पालिका परिषद ने मालरोड के समीप स्थित मुंशी हरि प्रसाद टम्टा धर्मशाला को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन अब तक धर्मशाला नहीं बन सकी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खूंट में 10 दिसंबर 2014 को पं. पंत जयंती पर धर्मशाला निर्माण के लिए एक करोड़ रुपए, इसके बाद पिछले साल पर्यटन मंत्री ने भी धर्मशाला निर्माण को 50 लाख रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक सरकार ने बजट जारी नहीं किया है। यदि चुनाव आचार संहिता से पहले धनराशि नहीं मिली तो धर्मशाला का निर्माण लटक जाएगा।
नगर में मालरोड में पूर्व में मुंशी हरि प्रसाद टम्टा धर्मशाला थी। जिसमें आकर राहगीर रुकते थे। जीर्ण-शीर्ण होने पर पालिका परिषद ने धर्मशाला को करीब सात साल पहले तोड़ दिया। इसके स्थान पर अब तक नई धर्मशाला नहीं बन सकी है। विभिन्न सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि लंबे समय से सरकार से धर्मशाला निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।
लोगों की मांग पर पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती पर खूंट में 10 सितंबर 2014 को हुए समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक करोड़ रुपये धर्मशाला निर्माण के लिए देने की घोषणा की थी। वहीं वर्ष 2015 में पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने भी इसी धर्मशाला के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की थी। करीब एक साल पहले ग्रामीण निर्माण विभाग ने धर्मशाला निर्माण के लिए 1.48 करोड़ का इस्टीमेट सरकार को भेजा है। सरकार के मुखिया और पर्यटन मंत्री की घोषणा अब तक कोरी ही साबित हुई है। शासन से पालिका को बजट अब तक अवमुक्त नहीं हुआ है। जिस कारण धर्मशाला का निर्माण नहीं हो सका है।