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रीढ़-पीठ के दर्द उड़नछू हुआ, अब खुद योग सिखाते हैं डॉ. कोठारी

Tue, 20 Jun 2017 10:13 PM IST
अल्मोड़ा़,अमर उजाला ब्यूरो
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योग करते बीपी कोठारी। - फोटो : अमर उजाला
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 गंभीर बीमारी होने पर अगर डाक्टरी इलाज से फायदा नहीं मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं है। नियमित योगाभ्यास से पुराने रोगों से भी छुटकारा पाना संभव है। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल में वरिष्ठ वैज्ञानिक रहे डॉ. बीपी कोठारी एक दुर्घटना में पसलियां टूटने और रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण करीब चार साल तक दर्द से जूझते रहे। कई अस्पतालों में इलाज कराया पर दर्द से छुटकारा नहीं मिला। उल्टा, दवाओं के साइड इफेक्ट से उन्हें एसिडिटी भी हो गई और इसके लिए भी उन्हें रोज एक टेबलेट लेनी पड़ती थी। 2014 में रिटायर होने के बाद उन्होंने नियमित योग करना शुरू किया। योगाभ्यास से छह माह में ही उन्हें चमत्कारिक फायदा हुआ और एक साल पूरा होते-होते वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए। डॉ. कोठारी कभी ठीक से बैठ नहीं पाते थे ,लेकिन अब वह पिछले करीब तीन साल से लोगों को नियमित रूप से मुफ्त में योग सिखा रहे हैं।         
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जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान से रिटायर हुए डा. बीपी कोठारी की कार 2010 में ऑफिस जाते वक्त कोसी के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में वह घायल हो गए और कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। तीन पसलियां टूट जाने और रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण उनको उठने-बैठने में तक दिक्कत होती रही। कई माह इलाज चला लेकिन दर्द दूर नहीं हुआ। वह पालथी मारकर बैठ तक नहीं पाते थे। 2014 तक डॉ. कोठारी लगातार दवाएं लेते रहे। उसी दौरान उन्हें एसिडिटी की भी शिकायत होने लगी तो एक टेबलेट और गले पड़ गई। डॉ. कोठारी के अनुसार  पसलियों और रीढ़ की हड्डी में दर्द बने रहने के साथ ही पेट की बीमारी के कारण वह उन दिनों काफी चिढ़चिढ़े भी हो गए थे। 2014 में रिटायर हुए तो उन्होंने बाबा रामदेव की संस्था भारत स्वाभिमान से जुड़े प्रशिक्षकों से योग सीखा और हर रोज प्रात: पांच से छह बजे तक योग करने लगे। इस दौरान उन्होंने अपने शरीर की जरूरत के मुताबिक मंडूक आसन, शसक आसन, सूर्य नमस्कार, मकर आसन आदि योगाभ्यास करने शुरू किए। साथ ही वह नियमित प्राणायाम भी करते थे।       

डॉ. कोठारी ने बताया कि योगाभ्यास शुरू करने के पांच-छह महीने के भीतर ही वह स्वस्थ महसूस करने लगे। एक साल के भीतर पसलियों के साथ ही रीढ़-पीठ का दर्द लगभग खत्म हो गया। जहां पहले 10 मिनट पालथी मारकर बैठना कठिन होता था अब वह एक-एक घंटे इस तरह बैठक सकते थे। योगाभ्यास से एसिडिटी की परेशानी भी समाप्त हो गई। योग के चमत्कार का अनुभव करने के बाद वह खुद भारत स्वाभिमान के प्रशिक्षक बन गए और अक्तूबर 2014 से नियमित रूप से लोगों को नि:शुल्क योग सिखाते हैं। उनकी योग की कक्षा सुबह पांच बजे से 6.30 बजे तक दुर्गा कांप्लेक्स धारानौला में चलती है। यहां हर रोज करीब 25 से 30 लोग योग सीखते हैं। आज योग उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। चिढ़चिढ़ापन भी अब नहीं रहा और वह काफी खुश रहते हैं। डॉ. कोठारी का कहना है कि नियमित योगाभ्यास के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता काफी बढ़ जाती है और इससे एक तरह व्यक्ति की आयु भी बढ़ जाती है। लोगों को निरोग, स्वस्थ और खुश रहने के लिए नियमित योगाभ्यास करना चाहिए।            
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