पर्वतीय क्षेत्र में शराब बड़ी समस्या है और इससे सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित होती हैं। राजनीतिक दलों के लोग और प्रत्याशी चुनाव के समय इस मुद्दे को भुनाते जरूर हैं। यहां तक कि चुनाव जीतने पर शराब पर अंकुश लगाने का भी भरोसा देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद यह मुद्दा राजनीतिक दलों और सरकारों के ठंडे बस्ते में चला जाता है। महिलाओं का कहना है कि बिहार प्रदेश की तरह ही उत्तराखंड सरकार को भी प्रदेश में शराब बंदी लागू करनी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे का का अभी तक समाधान न होने से महिलाओं में राजनैतिक दलों के खिलाफ नाराजगी भी है।
पल्यूड़ा गांव निवासी राधा देवी कहती हैं कि वर्तमान में युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आते जा रहा है। सरकार को प्रदेश में शराब बंदी लागू करनी चाहिए, जिससे कि युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त से बच सके। नशाखोरी पर रोक लगाने के लिए विधायकों और सरकारों को कारगर कदम उठाने चाहिए। पल्यूड़ा गांव निवासी बीना देवी कहती हैं कि नाबालिग बच्चे भी शराब की गिरफ्त में आ रहे हैं और युवा पीढ़ी बरबादी के कगार पर पहुंच रही है। यदि सरकार ने शराब पर अंकुश नहीं लगाया तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
सोमेश्वर निवासी बसंती देवी कहती हैं कि सरकार के रोजगार के साधन तो उपलब्ध नहीं करा पा रही है, लेकिन जगह-जगह शराब की दुकानें खोल दी गई हैं। जिससे नशे की आदी हो रही युवा पीढ़ी बरबादी के कगार पर पहुंच रही है। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं। सोमेश्वर निवासी प्रेमा देवी कहती हैं कि बिहार प्रदेश की तरह ही उत्तराखंड सरकार को भी शराब बंदी लागू करनी चाहिए। यदि शराब की दुकानें ही नहीं होंगी तो युवा वर्ग का भविष्य नशे में बरबाद नहीं होगा।