मार्च पहले पखवाड़े में काठगोदाम में लावारिस हालत में मिली चैती नगर से कुछ दूरी पर बख स्थित राजकीय शिशु सदन में पल रही है। शिशु सदन में पल रहे बच्चों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से गोद दिया जाता है। चैती को गोद लेने के लिए भी कई लोगों ने आवेदन किए हैं।
सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के बाद चैती को अल्मोड़ा के शिशु सदन में लाया गया। अब उसका यहीं पालन पोषण हो रहा है। चैती पूरी तरह स्वस्थ है। आया बदनी देवी उसकी देखरेख कर रही हैं। चैती के अलावा शिशु सदन के बड़े बच्चे चैती का पूरा ध्यान रखते हैं। शिशु सदन में एक महीने की चैती के अलावा पारू (एक), नैंसी (तीन), माही (नौ) माह और डेढ़ साल की सोनी की भी देखभाल की जा रही है। यह सभी बच्चे गोद दिए जाने योग्य हैं। इन सभी बच्चों को गोद लेने को अब तक 67 आवेदन जमा हो चुके हैं। इनमें से कई लोग चैती को घर ले जाना चाहते हैं।
इन सभी मासूम बच्चों की देखरेख आया बदनी देवी कर रही हैं। उनका कहना है कि छोटे बच्चों की देखभाल चुनौतीपूर्ण है। वर्षों से वह इस काम को महज नौकरी के उद्देश्य से नहीं बल्कि सेवा भाव से कर रही हैं।
समाज कल्याण अधिकारी चंद्रा चौहान ने बताया बच्चों को गोद देने की निर्धारित प्रक्रिया है। बाल कल्याण समिति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पात्र आवेदकों का चयन करती है। इसके बाद ही बच्चों को गोद दिया जाता है। वर्तमान में शिशु सदन में अब तक 67 आवेदकों ने बच्चों को गोद लेने के लिए आवेदन किया है।