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शासन के आदेश से अशासकीय स्कूलों के शिक्षक और कर्मचारी भड़के

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अल्मोड़ा। अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों ने शासन पर अशासकीय स्कूलों के खिलाफ आदेश जारी करने का आरोप लगाया है। अल्मोड़ा इंटर कॉलेज समेत अन्य स्थानों पर स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कई स्कूलों में शिक्षकों ने बैठक कर सरकार के आदेश का कड़ा विरोध किया और इस आदेश को वापस लेने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।
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शिक्षकों ने कहा कि शासन के अनुसचिव कृष्ण कुमार शुक्ल के आदेश के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक बीएस नेगी ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर अशासकीय स्कूलों की छात्र संख्या और परिणाम का आकलन कर समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शासकीय अनुदान के स्थान पर स्कूलों को अपने संसाधनों से ही वेतन आदि का वहन किए जाने की चेतावनी दी है।
उन्होंने अनुदान समाप्त करने को धमकी करार देते हुए विरोध किया और कहा कि यह अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों का उत्पीड़न है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
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बृहस्पतिवार को अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों ने एकजुटता दिखते हुए अपने-अपने स्कूलों में बैठक कर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यदि अशासकीय स्कूलों को दिया जाने वाला अनुदान समाप्त करने की कोशिश की गई तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
कृषि इंटर कॉलेज विजयपुर पाटिया में प्रधानाचार्य एमएस बिष्ट, हेमा चम्याल, हीरा सिंह मेहरा, महेंद्र सिंह चौहान, सुभाष चंद्र, सर्वोदय इंटर कालेज में दीपक जोशी, हरीश प्रसाद, शिवराज सिंह, हिमांशु पांडे, हरीदत्त पेटशाली इंटर कालेज चितई में प्रधानाचार्य कृष्णानंद जोेशी, डॉ. महेंद्र सिंह मेहरा, दीवान सिंह बिष्ट, हिमांशु पेटशाली, अशोक कुमार, इंटर कालेज दौलाघट में दीपक सिंह नयाल, राजेंद्र सिंह परिहार, नीमा नेगी, राजू महरा आदि ने भाग लिया।
इसके अलावा अन्य स्कूलों के शिक्षकों ने भी सरकार के आदेश का विरोध किया है। इधर माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री विनोद पांडे ने कहा है कि यदि शासन ने अशासकीय स्कूलों को दिया जाने वाला अनुदान वापस लेने की कोशिश की तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा और संगठन आंदोलन को बाध्य होगा।
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