राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख सुनीता हल्देकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम धरोहर है। विज्ञान, योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा आदि के द्वारा देश को विश्व गुरु माना गया है। मुगलों और अंग्रेजों ने देश के परम वैभव, समृद्ध संस्कृति को मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हल्देकर यहां तेजस्विनी तरुणी सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहीं थीं।
सरस्वती शिशु मंदिर जीवनधाम अल्मोड़ा में हुए सम्मेलन में उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में अद्वितीय विज्ञान विधा थी। जब अन्य देशों में यातायात की कल्पना तक नहीं थी, तब भारत के पास पुष्पक विमान आदि तकनीकी ज्ञान था। वैदिक गणित, आयुर्वेद, योग आदि विधाओं के जरिए देश ने विश्व का मागदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि षड्यंत्र के तहत मुगलों, अंग्रेजों ने परम वैभवशाली संस्कृति को कमजोर करने का काम किया। अंग्रेजों ने रणनीति के तहत भारत में मैकाले शिक्षा पद्धति को लागू किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां ज्ञान हीन बन जाएं। उन्होंने कहा कि भारत देश मात्र भूमि का टुकड़ा नहीं चैतन्यमयी मां है।
देश के प्राचीन वैभव को वापस लाने को देशवासियों को पुन: प्रयास करने होंगे। क्षेत्र कार्यवाहिका नीमा अग्रवाल, विभाग कार्यवाहिका गोदावरी चतुर्वेदी, जिला संयोजिका ज्योति त्रिवेदी, पूर्णिमा जोशी आदि ने विचार रखे। इस मौके पर भावना खोलिया, कमला पिलख्वाल, जीवंती लटवाल, चंपा रावल, प्रेमा बिष्ट, लता तिवारी आदि मौजूद थे।