तरन्नुम का स्वागत करते कुरेशियन मोहल्ले के लोग। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। आईटीबीपी कांस्टेबल कुरेशियन मोहल्ला निवासी तरन्नुम कुरैशी प्रशिक्षण लेकर घर पहुंची तो मोहल्ले वालों ने उनका खैैरमकदम किया। देशभक्ति गीतों के साथ लाइन में खड़े होकर तालियां बजाई गईं। उनका प्रशिक्षण पंचकुला में हुआ।
बिटिया की कामयाबी को देख महिलाओं की आंखों में आंसू छलक पड़े। तरन्नुम बचपन से मेधावी छात्रा रही हैं। उनके पिता अहमद बख्श और माता नफीसा खातून अब इस दुनिया में नहीं हैं। तरन्नुम ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की थी। सेना में जाने का उनका बचपन से ही शौक रहा है। तरन्नुम बताती हैं कि उन्हें माता पिता ने भी इसके लिए प्रेरित किया था। आठ भाई-बहन में सबसे छोटी तरन्नुम 2017 में आईटीबीपी के लिए चयनित हुईं। कोरोना के चलते वे घर नहीं आ पाई थीं। 167वें बैच में 600 कैडेटों का चयन हुआ, इसमें 77 बालिकाएं थीं। उनका दावा है कि उत्तराखंड से मात्र उन्हीं का चयन हुआ है। बालिकाओं के नाम संदेश देते हुए तरन्नुम ने कहा कि बालिकाएं हर क्षेत्र में प्रतिभाग कर रही है लेकिन अर्द्धसैनिक बलों में प्रदेश स्तर पर अभी बालिकाओं की संख्या कम है। उन्होंने बालिकाओं से अधिक से अधिक संख्या में सेना की भर्तियों में प्रतिभाग करने की अपील की है।