शहर के लोअर मालरोड से धारानौला सिकुड़ा बैंड तक टनल निर्माण को विशेषज्ञों से हरी झंडी मिलने के छह माह बाद भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि लोनिवि प्रांतीय खंड ने फिजिविलिटी रिपोर्ट दिसंबर में शासन को भेज दी थी। न तो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और न ही सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई की है। पांच माह से फिजिविलिटी रिपोर्ट शासन को ठंडे बस्ते में है।
शहरवासी लंबे समय से टनल निर्माण की मांग करते आ रहे थे। 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने टनल निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद 2016 में कांग्रेस सरकार ने टनल के फिजिविलिटी परीक्षण को लोनिवि प्रांतीय खंड को 50 लाख रुपये जारी किए। लोनिवि प्रांतीय खंड ने टनल निर्माण की संभावना जांचने को फिजिविलिटी परीक्षण का जिम्मा गुड़गांव की कंपनी एमबर्ग इंजीनियरिंग को सौंपा।
पहले मालरोड से धारानौला के लिए टनल प्रस्तावित की गई थी, लेकिन सर्वे में यह स्थान उपयुक्त नहीं पाया गया। इसके बाद कंपनी के विशेषज्ञों ने लोअर मालरोड में रोडवेज वर्कशॉप के समीप से सिकुड़ा बैंड (धारानौला) तक टनल निर्माण को फिजिविलिटी परीक्षण किया।
परीक्षण में इस स्थान से टनल निर्माण उपयुक्त पाया गया। कंपनी ने गत नवंबर में फिजिविलिटी रिपोर्ट लोनिवि प्रांतीय खंड को सौंपी। लोनिवि ने फिजिविलिटी रिपोर्ट को एप्रूवल के लिए प्रदेश सरकार को दिसंबर में भेजी। 1228 मीटर लंबे टनल के निर्माण में विशेषज्ञों के मुताबिक करीब डेढ़ अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है, लेकिन इस मामले में शासन स्तर से अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। जिससे टनल निर्माण का मामला अधर में लटक गया है।
यदि टनल का निर्माण होता है तो इससे जहां शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। वर्तमान में मालरोड, लोअर मालरोड से धारानौला पहुंचने के लिए सड़क से करीब दस से बारह किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। टनल बनने से यह दूरी बहुत कम हो जाएगी, वहीं टनल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी होगी।